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कलेक्टर बदलते ही सक्रिय हुए भूमाफिया, दत्ता कॉलोनी के बगल में शासकीय भूमि पर कब्जे की कोशिश

Ambikapur News : अंबिकापुर में एक बार फिर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आना प्रशासनिक सख्ती और भू-माफियाओं के बीच चल रही अदृश्य लड़ाई को उजागर करता है। दत्ता कॉलोनी, नमनाकला क्षेत्र में शासकीय भूमि पर किए जा रहे कथित अतिक्रमण को लेकर राजस्व विभाग ने गंभीरता दिखाई है और प्रारंभिक जांच के बाद तहसीलदार को प्रतिवेदन सौंपा गया है। यह मामला न केवल जमीन की सीमा को लेकर है, बल्कि शहर में फिर से सक्रिय हो रहे उन भूमाफियाओं की ओर भी इशारा करता है, जिनकी निगाहें कीमती शासकीय जमीनों पर टिकी रहती हैं।

जानकारी अनुसार कार्यालय राजस्व निरीक्षक नजूल अंबिकापुर द्वारा दिनांक 10 जनवरी 2026 को स्थल पर जाकर मौका मुआयना किया गया। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नमनाकला स्थित दत्ता कॉलोनी के बगल में राजस्व पट्टे की भूमि पर कब्जा कर मिट्टी भराव किया जा रहा है तथा प्रीकास्ट बाउंड्रीवाल का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों द्वारा इसकी सूचना दिए जाने के बाद राजस्व विभाग हरकत में आया और मौके की वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया गया।

राजस्व निरीक्षक के प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित भूमि राजस्व खसरा नंबर 243/2 एवं नजूल भूखंड क्रमांक 243/1 से संबंधित है। ऐसे में वास्तविक स्थिति तभी स्पष्ट हो पाएगी जब राजस्व और नजूल भूमि की संयुक्त टीम द्वारा सीमा निर्धारण किया जाएगा। इसी उद्देश्य से संयुक्त जांच टीम गठित कर सीमांकन कराने की अनुशंसा की गई है, ताकि यह तय किया जा सके कि अतिक्रमण किस भूमि पर और किस सीमा तक किया गया है।

यह पूरा मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि कुछ समय पहले तक तत्कालीन कलेक्टर विलास भोसकर के कार्यकाल में सरगुजा जिले में शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए लगातार सख्त अभियान चलाए गए थे। उस दौरान कई बड़े और रसूखदार लोगों पर कार्रवाई हुई थी, जिससे भूमाफियाओं में प्रशासन का खौफ साफ नजर आता था। लेकिन कलेक्टर के स्थानांतरण के बाद एक बार फिर शासकीय जमीनों पर कब्जे की कोशिशें शुरू होने लगी हैं।

बहुचर्चित बंसू लोहार प्रकरण

शहर के नमनाकला क्षेत्र का ही बहुचर्चित बंसू लोहार प्रकरण आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसमें राजमोहिनी देवी भवन के पीछे कई एकड़ बेशकीमती शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर उसकी बिक्री की गई थी। लंबे कानूनी संघर्ष और कई गिरफ्तारियों के बाद अंततः कलेक्ट्रेट न्यायालय ने उस पूरे प्रकरण में की गई रजिस्ट्री को शून्य घोषित करते हुए जमीन को शासकीय घोषित किया था।

अब दत्ता कॉलोनी के पास सामने आए इस नए मामले ने एक बार फिर प्रशासन की परीक्षा ले ली है। आमजन यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि पूर्व की तरह इस बार भी भूमाफियाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी और शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है।

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