Last Sunset 2025
Last Sunset 2025: जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आधी रात की ओर बढ़ रही हैं, पूरी दुनिया एक ऐतिहासिक पल की गवाह बन रही है। साल 2025 अब यादों के झरोखे में सिमट रहा है और वैश्विक स्तर पर नए साल 2026 का आधिकारिक स्वागत शुरू हो चुका है। भौगोलिक स्थिति और अलग-अलग टाइमजोन के कारण दुनिया के कुछ हिस्सों में नए साल का सूरज पहले ही चमक चुका है, जबकि कुछ जगहों पर लोग अभी भी 2025 के आखिरी घंटों का लुत्फ उठा रहे हैं। भारत में भी साल के अंतिम सूर्यास्त के साथ ही जश्न की तैयारियां तेज हो गई हैं।
दुनिया में नए साल का सबसे पहला स्वागत पैसिफिक आइलैंड में स्थित देश किरिबाती (Kiribati) में किया गया। किरिबाती के ‘लाइन आइलैंड्स’ में जैसे ही रात के 12 बजे, वहां 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो गई। किरिबाती के बाद ओशिनिया क्षेत्र के अन्य देशों में जश्न शुरू हुआ। इसी क्रम में न्यूजीलैंड में भी भारतीय समयानुसार शाम को ही रात के 12 बज गए और आतिशबाजी के साथ नए साल का जोरदार स्वागत किया गया। न्यूजीलैंड दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहाँ टाइमजोन के कारण किसी भी नए दिन की शुरुआत सबसे पहले होती है।
भारत के विभिन्न हिस्सों में साल 2025 का अंतिम सूर्यास्त बेहद भावुक और सुंदर रहा। भगवान जगन्नाथ की पावन नगरी पुरी में भक्तों ने समुद्र तट पर डूबते सूरज को नमन कर साल को विदा किया। वहीं, पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भी साल की आखिरी शाम का नजारा अद्भुत रहा। उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी अयोध्या में सरयू तट पर श्रद्धालुओं ने 2025 के अंतिम सूर्यास्त को देखा। सरयू की लहरों पर गिरती सूर्य की सुनहरी किरणों ने एक युग के अंत और नई आशाओं के उदय का संदेश दिया। अब पूरा भारत रात 12 बजे के इंतजार में पलकें बिछाए बैठा है।
नए साल का जश्न एक वैश्विक यात्रा की तरह है जो पूर्व से शुरू होकर पश्चिम की ओर बढ़ती है। ओशिनिया और न्यूजीलैंड के बाद अब यह कारवां पूर्वी एशिया (जापान, दक्षिण कोरिया) से होते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया और फिर दक्षिण एशिया (भारत, पाकिस्तान) तक पहुँचेगा। इसके बाद मध्य पूर्व के रेगिस्तानों, यूरोप के ऐतिहासिक शहरों और अफ्रीका के जंगलों से गुजरते हुए अंत में अमेरिका महाद्वीप तक पहुँचेगा। यह देखना दिलचस्प है कि जब किरिबाती में लोग 1 जनवरी की सुबह का नाश्ता कर रहे होंगे, तब अमेरिका के कई हिस्सों में लोग 31 दिसंबर की पार्टी की तैयारी कर रहे होंगे।
जहाँ किरिबाती और न्यूजीलैंड सबसे पहले नए साल का स्वागत करते हैं, वहीं दुनिया में कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहाँ 2026 सबसे देरी से पहुँचेगा। अमेरिका के नियंत्रण वाले ‘हाउलैंड आइलैंड’ और ‘बेकर आइलैंड’ ऐसे द्वीप हैं जहाँ सबसे आखिर में दिन की शुरुआत होती है। जब पूरी दुनिया नए साल के जश्न में सराबोर होकर अगले दिन के कामों में व्यस्त हो जाएगी, तब इन निर्जन द्वीपों पर 2026 की पहली किरण दिखाई देगी। यह टाइमजोन का वह चक्र है जो पूरी पृथ्वी को एक सूत्र में बांधे रखता है।
साल 2025 का सूर्यास्त केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह बीते हुए अनुभवों, चुनौतियों और सफलताओं को संजोने का एक अवसर है। भारत समेत पूरी दुनिया अब 2026 के स्वागत के लिए तैयार है। चाहे वह सिडनी हार्बर की आतिशबाजी हो या न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर का ‘बॉल ड्रॉप’, हर जगह उत्साह चरम पर है। उम्मीद है कि यह नया साल पूरी दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा।
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