Law And Order Bihar : बिहार में विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही राज्य की कानून-व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं। बीते एक सप्ताह के भीतर तीन बड़ी हत्याओं ने राज्य में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। हत्या के शिकार एक व्यवसायी, एक वरिष्ठ डॉक्टर और एक किराना दुकानदार हैं। तीनों की मौत गोली लगने से हुई, और तीनों घटनाएँ दिनदहाड़े हुईं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
शनिवार को सीतामढ़ी ज़िले के सबसे व्यस्त बाज़ार क्षेत्र में बदमाशों ने व्यवसायी पुटू खान को गोली मार दी। सीसीटीवी फुटेज में साफ़ देखा गया कि कैसे दिन के उजाले में, भीड़ के बीच पुटू खान को बेहद क़रीब से गोली मारी गई। उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस हत्या ने आम लोगों में डर और असुरक्षा की भावना भर दी है।
उसी दिन कुछ घंटों बाद, शेखपुरा गाँव में वरिष्ठ चिकित्सक सुरेंद्र कुमार को बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जान नहीं बच सकी। पुलिस घटना की जांच कर रही है और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, लेकिन हमलावरों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
शुक्रवार को हुई तीसरी हत्या में समस्तीपुर के विक्रम झा को गोली मार दी गई। वह एक स्थानीय किराना दुकान चलाते थे। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच जारी है, लेकिन अब तक हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। इन तीनों मामलों में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे पुलिस की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। लगातार हो रही हत्याओं पर विपक्ष ने सरकार की तीखी आलोचना की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वहीं भाजपा के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, “बिहारवासी और कितनी हत्याएँ देखेंगे? बिहार पुलिस की क्या ज़िम्मेदारी है, यह समझ से परे है।”
नीतीश सरकार ने इन हत्याओं के लिए प्रत्यक्ष रूप से राजद को जिम्मेदार ठहराया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रशासन अपना काम सही से कर रहा है और राज्य में कोई संगठित अपराध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद जानबूझकर चुनावी माहौल में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है ताकि वोटों को प्रभावित किया जा सके। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की घटनाएँ राज्य के प्रशासनिक ढाँचे को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। जबकि एक ओर सरकार इन वारदातों के पीछे साज़िश बता रही है, दूसरी ओर जनता और विपक्ष कानून-व्यवस्था की नाकामी पर सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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