LeT ISKP Nexus
LeT ISKP Nexus: भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक साजिश का पर्दाफाश किया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के करीब 7 महीने बाद, पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा एक बार फिर भारत को दहलाने की तैयारी में है। खुफिया सूत्रों से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस बार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पाकिस्तान ने लश्कर के 12 सबसे खूंखार और प्रशिक्षित फिदायीन आतंकियों को ‘इस्लामिक स्टेट खोरासान’ (ISKP) में शामिल करवाया है। इस चाल का मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि भारत में कोई बड़ा हमला होता है, तो उसका ठीकरा वैश्विक आतंकी संगठन ISKP पर फूटे और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय दबाव से ‘डिनाएबिलिटी’ (इनकार करने की क्षमता) मिल सके।
इस नए ‘लश्कर-ISKP’ मॉड्यूल की कमान लश्कर के पुराने कमांडर अबू हुरैरा को सौंपी गई है, जो 2021 से भारत में सक्रिय रहकर आतंकी नेटवर्क चला रहा है। उसका डिप्टी कमांडर मोहम्मद उमर उर्फ खरगोश है। इस ग्रुप का एक और प्रमुख चेहरा अबू दुजाना है, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला है। दुजाना को 2018 में लश्कर ने विशेष ट्रेनिंग दी थी और महज 18 साल की उम्र में उसे जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के लिए भेजा गया था। इन आतंकियों को मुजफ्फराबाद और फॉरवर्ड कहुटा स्थित लश्कर के ट्रेनिंग कैंपों में फिदायीन हमलों के लिए तैयार किया गया है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त 2025 में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इसमें PoK सेक्टर कमांडर ब्रिगिडेयर फैक अयूब (जिसे ‘पंजाब के कसाई’ के नाम से जाना जाता है) ने लश्कर के टॉप कमांडर सैफुल्लाह साजिद जट्ट और हुजैफा बकरवाल के साथ रणनीति साझा की। निर्देश स्पष्ट थे—फिदायीन दस्ता लश्कर का होगा, ट्रेनिंग पाकिस्तान में होगी, लेकिन हमले के बाद जिम्मेदारी ISKP लेगा। इस मॉड्यूल को तैयार करने में रावलपिंडी के हुजैफा बकरवाल की मुख्य भूमिका है, जो वर्तमान में इस पूरे ऑपरेशन का संचालन कर रहा है।
साजिशों के बीच लश्कर के आतंकियों के हौसले फिर से बुलंद होते दिख रहे हैं। 13 जनवरी 2026 को PoK के रावलाकोट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए लश्कर के आतंकी अब्दुल्लाह कश्मीरी उर्फ अबू मूसा ने जहर उगला। उसने खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि कश्मीर को आजादी भीख मांगने से नहीं, बल्कि “हिंदुओं की गर्दनें काटने” से मिलेगी। उसने जोर देकर कहा कि कश्मीर का मुद्दा केवल जिहाद और आतंकवाद के जरिए ही हल किया जा सकता है। यह बयान स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन एक बार फिर कश्मीर में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश में हैं।
डिफेंस एक्सपर्ट्स और पूर्व सैन्य अधिकारियों का मानना है कि लश्कर और इस्लामिक स्टेट का यह ‘जॉइंट मॉड्यूल’ पूरी तरह से ISI की उपज है। पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि अब किसी भी आतंकी हमले को ‘एक्ट ऑफ वॉर’ (युद्ध की कार्रवाई) माना जाएगा और उसका जवाब उसी तीव्रता से दिया जाएगा। वर्तमान में पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल अहमद एहसान नवाज और ब्रिगेडियर फैक अयूब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की कमान संभाल रहे हैं। अक्टूबर और दिसंबर 2025 में जैश और लश्कर को हमले फिर से शुरू करने का ‘ग्रीन सिग्नल’ दिया जा चुका है, जिसके बाद भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
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