बीजापुर@thetarget365 : दंतेवाड़ा और बीजापुर के सीमावर्ती क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में मारे गए बड़े नक्सली लीडर से पुलिस को एक महत्वपूर्ण पत्र बरामद हुआ है, जिससे कई अहम खुलासे हुए हैं। इस पत्र में नक्सलियों द्वारा किए गए नए भर्ती प्रयासों और उनके प्रशिक्षण के बारे में जानकारी दी गई है।
यह पत्र तेलुगु भाषा में लिखा गया था और इसमें यह उल्लेख किया गया है कि नक्सल संगठन ने हाल ही में माड़ क्षेत्र में ग्राम सभा आयोजित कर 130 से अधिक लड़ाकों को भर्ती किया है, जिनमें 9 से 17 वर्ष तक के 40 बच्चे शामिल हैं।
पत्र के अनुसार भर्ती किए गए अधिकांश युवा लड़ाकों को लड़ाई के लिए प्रशिक्षण नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें नक्सलवाद, संगठन की नीति, राजनीति, और सैन्य प्रशिक्षण की शुरुआत दी गई है। 18 से 22 साल के 50 लड़के-लड़कियों को हथियार चलाने की प्रशिक्षण दी गई है, जबकि छोटे बच्चों को पढ़ाई की गई है। इन बच्चों को नक्सल संगठन के इतिहास, भौगोलिक स्थिति और क्रांति की जानकारी दी गई है, जिससे उनका मानसिक रूप से संगठन के लिए तैयार किया जा सके।
यह भी उल्लेख है कि नक्सली संगठन में अब भर्ती की प्रक्रिया में कठिनाई आ रही है और उन्हें नए भर्ती के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पत्र में यह चिंता व्यक्त की गई है कि यदि नए भर्ती नहीं होते हैं, तो नक्सलवाद का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसी कारण नक्सल संगठन को नई भर्ती की आवश्यकता महसूस हो रही है।
साथ ही, पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि कोई नया भर्ती व्यक्ति अपने परिवार से मिलना चाहता है तो उसे जंगल में स्थित संगठन के ठिकाने पर ही बुलाया जाएगा। परिवार से मिलने के लिए संगठन के बड़े नेताओं की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नक्सलियों का मानना है कि यह कदम संगठन के भीतर मौजूद संभावित सरेंडरों और पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए उठाया गया है।
इस पत्र से यह भी साफ हुआ कि सुधाकर उर्फ मुरली, जिनका एनकाउंटर हुआ था, नक्सल संगठन के शिक्षा विभाग के प्रमुख थे। वे संगठन के लिए नए भर्ती को प्रशिक्षित करने और उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने का कार्य करते थे। उनके मारे जाने के बाद, नक्सल संगठन में एक डर का माहौल पैदा हो गया है, और नए भर्ती होने में कठिनाई आ रही है।
इन तमाम घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि नक्सली संगठन में भर्ती और लड़ाई की तैयारियों को लेकर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। साथ ही, यह भी दिखाता है कि नक्सलवाद अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि नये लड़ाके उसकी ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं।
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