Lohri 2026 Rituals
Lohri 2026 Rituals: उत्तर भारत, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में लोहड़ी का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि कड़ाके की ठंड की विदाई, नई फसल के स्वागत और सूर्य देव के उत्तरायण होने की खुशी का प्रतीक है। लोहड़ी की शाम को परिवार और समुदाय के लोग एक साथ मिलकर ‘अग्नि प्रज्वलित’ (Bonfire) करते हैं। इस पवित्र अग्नि के चारों ओर परिक्रमा की जाती है और लोकगीत गाए जाते हैं। मान्यता है कि इस अग्नि में विशिष्ट चीजें अर्पित करने से न केवल अग्नि देव का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि जीवन के दुख-कष्ट भी जलकर राख हो जाते हैं।
लोहड़ी की अग्नि में तिल डालना सबसे अनिवार्य माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से तिल को शुद्धता और अक्षय पुण्य का प्रतीक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि अग्नि में तिल अर्पित करने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है और पुराने पापों का शमन होता है। इसी प्रकार, गुड़ को ज्योतिष शास्त्र में मंगल और सूर्य का कारक माना गया है। लोहड़ी की अग्नि में गुड़ या गुड़ से बनी गजक अर्पित करने से पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। आयुर्वेद भी सर्दियों में तिल और गुड़ के सेवन को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला मानता है।
पवित्र अग्नि में मूंगफली अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे नई फसल की उपज के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका माना जाता है। कहते हैं कि अग्नि देव को मूंगफली भेंट करने से माता अन्नपूर्णा की विशेष कृपा बनी रहती है और घर के भंडार कभी खाली नहीं होते। वहीं, तिल और गुड़ के मिश्रण से बनी रेवड़ी लोहड़ी का मुख्य प्रसाद है। इसे अग्नि में डालने से घर-परिवार को बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है और आपसी प्रेम व विश्वास प्रगाढ़ होता है। परिक्रमा के दौरान लोग इन चीजों को अग्नि में डालते हुए “आदर आए, दलिदर जाए” का जाप करते हैं।
मक्के से बने पॉपकॉर्न और धान की खील को अग्नि में डालना आर्थिक समृद्धि का संकेत माना जाता है। यह प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है कि उसने हमें पर्याप्त अन्न प्रदान किया है। ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि लोहड़ी की अग्नि में पॉपकॉर्न अर्पित करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। यह परंपरा इस बात का भी संदेश देती है कि अपनी खुशियों का पहला हिस्सा ईश्वर और प्रकृति को समर्पित करना चाहिए।
मुख्य पांच सामग्रियों के अलावा, कई क्षेत्रों में लोहड़ी की अग्नि में गन्ने के छोटे टुकड़े, सूखा नारियल (गोला), घी, जौ और चावल डालने का भी विधान है। इसके अतिरिक्त चने, गेहूं, सूखे मेवे, बताशे, मखाने और शकरकंद भी अर्पित किए जा सकते हैं। कुछ लोग जीवन में आरोग्य की कामना के लिए हल्दी की गांठ और इलायची भी अग्नि को समर्पित करते हैं। ये सभी सामग्रियां मिलकर यज्ञ के समान वातावरण बनाती हैं, जिससे वातावरण शुद्ध होता है और मन में शांति का संचार होता है।
लोहड़ी की अग्नि में अर्पित की जाने वाली हर वस्तु का अपना एक विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। यह अग्नि त्याग, समर्पण और नई शुरुआत का संदेश देती है। जब हम अपनी प्रिय वस्तुएं अग्नि देव को समर्पित करते हैं, तो हम वास्तव में अपने अहंकार और नकारात्मकता को जला रहे होते हैं। 13 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली यह लोहड़ी आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां, सौभाग्य और बेहतर स्वास्थ्य लेकर आए, इसी कामना के साथ अग्नि पूजन की इन विधियों को जरूर अपनाएं।
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