LPG Tanker Shivalik
LPG Tanker Shivalik: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थितियों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। खाड़ी देशों से एलपीजी (LPG) लेकर आ रहा भारतीय मालवाहक जहाज ‘शिवालिक’ सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है। यह जहाज सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील और खतरनाक माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फंसा हुआ था। शिपिंग मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पुष्टि की है कि जहाज अब युद्ध प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकल चुका है और भारतीय तट पर अपनी खेप उतारने के लिए तैयार है। इस सफलता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बनी चिंताओं को फिलहाल कम कर दिया है।
शिपिंग मंत्रालय ने होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल से लदा एक अन्य महत्वपूर्ण जहाज ‘जग लाडकी’ भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से रवाना होकर भारत की ओर बढ़ रहा है और कल तक मुंद्रा पोर्ट पहुंच जाएगा। इसी क्रम में एलपीजी लेकर आ रहा जहाज ‘नंदा देवी’ भी कल कांडला बंदरगाह पर लंगर डालेगा। हालांकि, स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण है; अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में लगभग 22 अन्य जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में सुरक्षा कारणों से रुके हुए हैं। सरकार इन जहाजों की आवाजाही पर निरंतर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि कार्गो की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
विदेश मंत्रालय ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए चलाए जा रहे बचाव अभियान की जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, 550 भारतीय नागरिकों को जमीनी रास्ते से ईरान की सीमा पार कराकर आर्मेनिया भेजा गया है। इनमें से 234 लोग वे श्रद्धालु हैं जो धार्मिक यात्रा पर ईरान गए थे। इसके अतिरिक्त, 90 भारतीयों को अजरबैजान के मार्ग से स्वदेश लाया जा रहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास विपरीत परिस्थितियों में भी पूरी क्षमता से काम कर रहा है और छात्रों को असुरक्षित शहरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने में जुटा है।
खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते हालात के बीच भारत सरकार ने अब तक लगभग 20,000 नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने में सफलता प्राप्त की है। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि सऊदी अरब और ओमान से भारत के विभिन्न शहरों के लिए नियमित उड़ानें संचालित की जा रही हैं। हालांकि, कुवैत का एयरस्पेस 28 फरवरी 2026 से ही बंद है और कतर का हवाई क्षेत्र केवल सीमित रूप से खुला है। बहरीन और इराक में जहां हवाई सेवाएं बाधित हैं, वहां भारतीय दूतावास नागरिकों को सड़क मार्ग से सऊदी अरब पहुँचाने में मदद कर रहा है, ताकि वे वहां से भारत के लिए उड़ान भर सकें।
इस पूरे संकट के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय और दूतावासों ने असाधारण सक्रियता दिखाई है। वीज़ा संबंधी औपचारिकताओं से लेकर आव्रजन (Immigration) प्रक्रियाओं तक, सरकार हर मोर्चे पर अपने नागरिकों के साथ खड़ी है। तेहरान और अन्य खाड़ी देशों में स्थित भारतीय मिशन न केवल जानकारी साझा कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बिठाकर भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक क्षेत्र में स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक बचाव कार्य और निगरानी की यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी।
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