Shankaracharya Avimukteshwaranand
Magh Mela 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण पर्व ‘मौनी अमावस्या’ पर आस्था का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद, संगम तट पर श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा है कि तिल रखने की भी जगह नहीं बची है। मेला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक ही 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पुण्य की डुबकी लगा चुके थे। प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि दिन ढलने तक यह संख्या 3 करोड़ के पार पहुँच सकती है। शनिवार से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जिसके चलते रविवार तड़के से ही संगम की ओर जाने वाले सभी मार्ग भक्तों से भर गए।
मेले की इस भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक विवादित स्थिति उत्पन्न हो गई। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब अपने भव्य काफिले और रथ के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे, तब प्रशासन ने उनके जुलूस को बीच में ही रोक दिया। संगम की तरफ बढ़ रहे अत्यधिक दबाव को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने शंकराचार्य से रथ से उतरकर पैदल आगे बढ़ने का विनम्र आग्रह किया। हालांकि, उनके समर्थक और अनुयायी इस बात पर अड़ गए कि शंकराचार्य अपने पारंपरिक वैभव के साथ ही संगम तक जाएंगे।
जब पुलिस ने सुरक्षा कारणों और भीड़ के नियंत्रण का हवाला देकर रथ को आगे बढ़ने से मना किया, तो शंकराचार्य के समर्थक आक्रोशित हो गए। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और समर्थकों की पुलिसकर्मियों के साथ तीखी झड़प और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। समर्थकों का आरोप था कि प्रशासन धार्मिक परंपराओं में बाधा डाल रहा है, जबकि पुलिस का तर्क था कि संकरी गलियों में रथ ले जाने से भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती है। फिलहाल स्वामी जी का जुलूस रुका हुआ है और प्रशासन के आला अधिकारी उन्हें मनाने और रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं।
प्रयागराज मेला प्रशासन के अनुसार, मौनी अमावस्या पर स्नान का सिलसिला शनिवार आधी रात के बाद से ही शुरू हो गया था। आंकड़ों पर नजर डालें तो सुबह 4 बजे तक ही लगभग 50 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। सुबह 7 बजे तक यह संख्या बढ़कर 75 लाख पहुँच गई और 8 बजते-बजते 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। ज्ञात हो कि बीते शनिवार को भी करीब 1.5 करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई थी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं और ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी जा रही है।
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से प्रशासन की व्यवस्थाओं की कड़ी परीक्षा हो रही है। संगम नोज पर दबाव को कम करने के लिए कई अतिरिक्त घाट बनाए गए हैं, फिर भी मुख्य संगम क्षेत्र में लोगों की भारी भीड़ है। रूट डायवर्जन और वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध के बावजूद पैदल चलने वालों का तांता लगा हुआ है। मेला अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार लाउडस्पीकर से निर्देश दे रहे हैं। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती शंकराचार्य के काफिले और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच संतुलन बनाए रखना है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि देश के कोने-कोने से साधु-संत, कल्पवासी और आम गृहस्थ इस दिन प्रयागराज पहुँचते हैं। संगम की रेती पर लाखों लोगों का एक साथ प्रार्थना करना आध्यात्मिकता का वह स्वरूप पेश करता है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। आज का यह पर्व माघ मेले के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों में से एक है।
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