Magh Mela 2026
Magh Mela 2026 : प्रयागराज के माघ मेले में पिछले पांच दिनों से धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सेहत में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कड़ाके की ठंड और लगातार खुले में बैठने के कारण उन्हें तेज बुखार ने जकड़ लिया है। उनके शिष्यों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्वामी जी सुबह से अपनी वैनिटी वैन से बाहर नहीं निकले हैं और भीतर ही विश्राम कर रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वसंत पंचमी जैसे महापर्व पर भी उन्होंने संगम में पावन स्नान नहीं किया। शिष्यों का कहना है कि सर्दी के प्रकोप और मानसिक तनाव ने उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
यह पूरा विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों और मेला नियमों का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। अधिकारियों ने उन्हें पालकी छोड़कर पैदल जाने का निर्देश दिया, जिसका स्वामी जी और उनके अनुयायियों ने कड़ा विरोध किया। इस दौरान पुलिस और शिष्यों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। अपमान का आरोप लगाते हुए अविमुक्तेश्वरानंद उसी दिन से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने संकल्प पर अडिग हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक माघ मेला प्रशासन अपने व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वे अपना धरना खत्म नहीं करेंगे और न ही संगम स्नान करेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि जब उनका मौनी अमावस्या का ही स्नान अधूरा रह गया है, तो वे वसंत पंचमी का स्नान कैसे कर सकते हैं? उनके अनुसार, प्रशासन ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल खेलकर उन्हें प्रताड़ित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासन ने अब इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है, जिससे गतिरोध और बढ़ गया है।
स्वामी जी इस बार माघ मेले में सवा लाख मिट्टी के शिवलिंगों की स्थापना करने के धार्मिक संकल्प के साथ आए थे। यह एक बड़ा आध्यात्मिक अनुष्ठान था, जिसे मौनी अमावस्या के दिन संपन्न होना था। हालांकि, प्रशासन के साथ हुए विवाद और उसके बाद शुरू हुए धरने के कारण यह अनुष्ठान बीच में ही लटक गया है। शिवलिंग अभी भी स्थापित नहीं हो सके हैं, जिससे उनके अनुयायियों में भारी निराशा है। धार्मिक कार्यों में आई इस बाधा को स्वामी जी ने सनातन परंपराओं पर आघात बताया है।
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को किसी का नाम लिए बिना कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि किसी को भी धार्मिक परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने ‘कालनेमि’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। इसके विपरीत, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का रुख नरम दिखा। उन्होंने स्वामी जी को ‘ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य’ कहकर संबोधित किया और उनसे विनम्र प्रार्थना की कि वे स्नान कर इस विवाद को समाप्त करें।
मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटों के भीतर दो कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। पहले नोटिस में उनके द्वारा ‘शंकराचार्य’ पदवी के उपयोग पर वैधानिक सवाल उठाए गए, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के हंगामे के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया। प्रशासन ने यहाँ तक चेतावनी दी है कि उन्हें भविष्य के माघ मेलों से हमेशा के लिए प्रतिबंधित (बैन) किया जा सकता है। स्वामी जी ने इन दोनों नोटिसों का लिखित जवाब भेज दिया है, लेकिन समाधान की जगह टकराव की स्थिति बनी हुई है।
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