Maharashtra Civic Polls: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राज्य में सत्तासीन ‘महायुति’ गठबंधन के दो प्रमुख घटक दल, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), स्थानीय निकाय चुनाव के मैदान में आमने-सामने आ गए हैं। गठबंधन सरकार का हिस्सा होने के बावजूद, कई शहरों में दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे उपजा तनाव अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की सीमा तक पहुँच गया है।
Maharashtra Civic Polls: पिंपरी चिंचवड़ से शुरू हुआ आरोपों का दौर
विवाद की शुरुआत तब हुई जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे की पिंपरी चिंचवड़ महानगरपालिका के संदर्भ में बीजेपी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भाजपा पर भ्रष्टाचार और ‘हफ्ता वसूली’ जैसे गंभीर आरोप लगाए। अजित पवार के इन बयानों ने बीजेपी खेमे में खलबली मचा दी है। गठबंधन सरकार में साथ होने के बावजूद इस तरह के सार्वजनिक हमलों ने दोनों दलों के बीच बढ़ती कड़वाहट को उजागर कर दिया है।
Maharashtra Civic Polls: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार: “मुश्किल में पड़ जाएंगे अजित दादा”
अजित पवार के आरोपों पर महाराष्ट्र बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पुणे में मीडिया से बात करते हुए अजित पवार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उन्हें अपनी सीमाएं याद रखनी चाहिए। चव्हाण ने कहा, “अगर हम बोलने लगे, तो अजित दादा के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। उन्हें दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने खुद के गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।” चव्हाण का यह बयान सीधे तौर पर अजित पवार के राजनीतिक अतीत और उन पर लगे पुराने मामलों की ओर इशारा करता है।
“पीएम मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी पर बोलने से पहले बरतें सावधानी”
रविन्द्र चव्हाण ने अजित पवार को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वे किसके बारे में बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के समय ऐसे बयान देना आपको शोभा नहीं देता। आरोप-प्रत्यारोप की भी एक मर्यादा होती है। अगर बीजेपी ने अपने तरकश से तीर छोड़ने शुरू किए, तो अजित पवार को जवाब देते नहीं बनेगा।” चव्हाण ने स्पष्ट किया कि बीजेपी नेतृत्व इस तरह के निराधार आरोपों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
सिंचाई घोटाले का जिक्र और अजित पवार की सफाई
इससे पहले, केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने एनसीपी द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में अजित पवार ने बिना नाम लिए बीजेपी पर बड़ा पलटवार किया। उन्होंने पुरानी बातों को कुरेदते हुए कहा, “मुझ पर भी 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोप लगाए गए थे। आज वही लोग मेरे साथ सत्ता में बैठे हैं जिन्होंने ये आरोप लगाए थे। क्या वे लोग अब मुझे दोषी नहीं मानते?” उन्होंने आगे कहा कि किसी पर आरोप लगने का मतलब यह नहीं कि वह अपराधी साबित हो गया।
अपराधियों को संरक्षण देने के मुद्दे पर छिड़ी रार
अजित पवार ने बीजेपी पर भगोड़े अपराधियों की मदद करने का भी परोक्ष आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड उठाकर देखना चाहिए कि किस पार्टी ने कितने आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को नियुक्त किया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी व्यक्ति को केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है? इन बयानों ने निकाय चुनावों के माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।
निकाय चुनावों में गठबंधन का भविष्य अधर में?
महाराष्ट्र के विभिन्न नगर निगमों और नगरपालिकाओं के चुनावों में जिस तरह बीजेपी और अजित पवार गुट एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं, उससे गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लग गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह जुबानी जंग नहीं रुकी, तो इसका असर राज्य सरकार के कामकाज और आगामी विधानसभा सत्र पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
















