Maharashtra excise scam : दिल्ली और छत्तीसगढ़ के बाद अब आबकारी भ्रष्टाचार के आरोप भाजपा शासित महाराष्ट्र में भी उभरकर सामने आए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताज़ा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब लाइसेंस नवीनीकरण शुल्कों के मूल्यांकन में लापरवाही और प्रशासनिक गड़बड़ियों के चलते यह राजस्व घाटा हुआ।
CAG रिपोर्ट के मुताबिक, लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क के गलत मूल्यांकन से राज्य को 20.15 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ, जबकि इसके ब्याज के रूप में 70.22 करोड़ रुपये की वसूली नहीं हो सकी। यह नुकसान सिर्फ कागजी गलती नहीं, बल्कि संभावित प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि तत्कालीन आबकारी आयुक्त ने राज्य सरकार की मंजूरी के बिना बिहार के पुराने स्टॉक पर आबकारी शुल्क माफ कर दिया। इसके अलावा, पर्यवेक्षण शुल्क न लगाने से सरकार को 1.20 करोड़ रुपये का और नुकसान हुआ।
शराब के रासायनिक विश्लेषण के लिए सैंपल देरी से जमा करने के कारण 73.18 करोड़ रुपये का कर संग्रह अधर में रह गया। इस मामले में माइंड बीयर के नमूनों की समय पर जांच न होने को बड़ी प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।
CAG ने यह भी बताया कि विभिन्न उत्पादों और ब्रांड्स की उत्पादन लागत का कम मूल्यांकन किया गया, जिससे 38.34 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई। साथ ही, आयातित विदेशी शराब की खरीद लागत में हुई गलती के चलते सरकार को अगस्त 2018 से मार्च 2022 तक 11.48 करोड़, और मई 2017 से मार्च 2022 तक 2.89 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा।
जैसे ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, विपक्षी दलों ने महाराष्ट्र सरकार और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर राजस्व में हेरफेर बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं हो सकता। कई नेताओं ने मामले की CBI या न्यायिक जांच की मांग की है।
दिल्ली में आबकारी नीति को लेकर आप सरकार के खिलाफ केंद्र की कार्रवाई के बाद कई मंत्री जेल में हैं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी गिरफ्तार हो चुके हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में ईडी ने आबकारी घोटाले में भूपेश बघेल के बेटे को गिरफ्तार किया था। अब महाराष्ट्र में सामने आए इस घोटाले ने इसे एक राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है।
महाराष्ट्र में सामने आया यह आबकारी घोटाला एक चिंताजनक प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। CAG की रिपोर्ट महज़ दस्तावेज़ी चेतावनी नहीं, बल्कि एक गंभीर वित्तीय संकट का संकेत है। इस मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच न सिर्फ आवश्यक है, बल्कि जनता के विश्वास की पुनःस्थापना के लिए अनिवार्य भी। अब देखना यह है कि क्या महाराष्ट्र सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करती है या यह मामला भी बाकी राज्यों की तरह राजनीतिक शोर में दब जाएगा।
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