Fish Farming AI: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को मजबूती देने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब राज्य में मीठे पानी की मछली के उत्पादन को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लिया जाएगा। विधानसभा में बजट मांगों पर चर्चा के दौरान राज्य के मत्स्य विकास मंत्री नितेश राणे ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की। सरकार का विजन तकनीक के माध्यम से पारंपरिक मत्स्य पालन को आधुनिक और अधिक लाभदायक बनाना है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

एआई टूल्स से होगी तालाबों और जलाशयों की सटीक मैपिंग
मंत्री नितेश राणे के अनुसार, राज्य सरकार एआई टूल्स की मदद से महाराष्ट्र के सभी तालाबों और जल निकायों की डिजिटल मैपिंग कर रही है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किस जल निकाय की वास्तविक मछली उत्पादन क्षमता कितनी है। वर्तमान में, विशेष रूप से विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में, डेटा की भारी कमी है। पिछले 30-40 वर्षों से कई तालाब विभिन्न संस्थाओं को आवंटित तो हैं, लेकिन वहां कितना उत्पादन हो रहा है, इसका सटीक विवरण उपलब्ध नहीं है। एआई आधारित मैपिंग से पानी की मात्रा, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता का वास्तविक डेटा प्राप्त होगा।
उत्पादन में 30 प्रतिशत वृद्धि के लिए गाद हटाओ अभियान
सटीक डेटा प्राप्त होने के बाद, सरकार उन संस्थाओं और मत्स्य पालकों से संपर्क करेगी जो इन जलाशयों का प्रबंधन कर रहे हैं। उन्हें मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीकी और वैज्ञानिक सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्री ने एक महत्वपूर्ण समस्या की ओर इशारा करते हुए बताया कि कई तालाबों में वर्षों से गाद (मिट्टी) जमा होने के कारण उनकी जल धारण क्षमता कम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से तालाबों से गाद हटा दी जाए, तो मछली उत्पादन में तत्काल 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
मत्स्य उत्पादन रैंकिंग सुधारने के लिए मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना
विशाल जल संसाधनों के बावजूद, महाराष्ट्र वर्तमान में मीठे पानी की मछली के उत्पादन में देश में 16वें स्थान पर है। इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ को रफ्तार दी है। यह एक व्यापक पहल है जिसके तहत कुल 28 नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। इनमें 6 योजनाएं राज्य स्तर पर और 19 योजनाएं जिला स्तर पर लागू की जाएंगी। इस पहल का सीधा उद्देश्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और छोटे मछली पालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
1,024 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट और कृषि का दर्जा
मत्स्य पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 1,024 करोड़ रुपये का एक समर्पित बजट आवंटित किया है। एक ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए नितेश राणे ने बताया कि महाराष्ट्र में अब मछली पालन को ‘कृषि’ का दर्जा दे दिया गया है। इस बदलाव का अर्थ है कि अब राज्य के मछली पालकों को भी बिजली बिल में रियायत, कम ब्याज पर ऋण और अन्य सरकारी लाभ उसी तर्ज पर मिलेंगे, जैसे पारंपरिक किसानों को मिलते हैं। इससे इस क्षेत्र में निवेश और युवाओं की रुचि बढ़ने की उम्मीद है।
रोजगार और आय का बड़ा स्रोत बनेगा मत्स्य पालन
केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों में मछली उत्पादन में 47 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि एआई तकनीक, गाद हटाने के अभियान और भारी बजटीय सहायता के तालमेल से यह क्षेत्र ग्रामीण महाराष्ट्र के लिए रोजगार सृजन का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। आधुनिक प्रबंधन के जरिए महाराष्ट्र न केवल अपनी रैंकिंग में सुधार करेगा, बल्कि ताजे पानी की मछली के निर्यात में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।


















