Maharashtra MLC Election
Maharashtra MLC Election : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर चुनावी गहमागहमी तेज होने वाली है। चुनाव आयोग ने विधान परिषद (MLC) की उन नौ सीटों के लिए चुनावी कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जो आगामी मई महीने में रिक्त होने जा रही हैं। राज्य की विधायी व्यवस्था में इन सीटों का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि इनमें पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शरद पवार व अजीत पवार गुट के कई दिग्गज नेताओं का भविष्य दांव पर लगा है। इन नौ सदस्यों का कार्यकाल 13 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिससे पहले नई नियुक्तियां अनिवार्य हैं।
चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, इस चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत 23 अप्रैल से नामांकन पत्र दाखिल करने के साथ होगी। इच्छुक उम्मीदवार 30 अप्रैल तक अपना पर्चा भर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच के बाद, उम्मीदवार 4 मई 2026 तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। मुख्य चुनावी मुकाबला 12 मई को होगा, जिसमें सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान चलेगा। विशेष बात यह है कि मतों की गणना भी उसी दिन यानी 12 मई को शाम 5 बजे से शुरू कर दी जाएगी, जिससे परिणाम भी देर रात तक स्पष्ट हो जाएंगे।
जिन नौ सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के कद्दावर नाम शामिल हैं। इस सूची में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के अलावा नीलम दिवाकर, भाजपा के संजय किशनराव केनेकर, संदीप दिवाकर जोशी और दादा राव यादवराव केचे शामिल हैं। इसके साथ ही अजीत पवार गुट के अमोल रामकृष्ण मिटकरी, रणजीत सिंह मोहिते-पाटिल, कांग्रेस के राजेश राठौड़ और शरद पवार गुट के शशिकांत शिंदे का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। इन नेताओं की विदाई के बाद विधान परिषद का समीकरण पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों का गणित इस बार बेहद पेचीदा है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी 132 विधायकों के साथ सबसे बड़ी शक्ति है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 56 और अजीत पवार की एनसीपी के पास 41 विधायक हैं। दूसरी ओर, महा विकास अघाड़ी (MVA) की स्थिति काफी कमजोर नजर आ रही है। उद्धव ठाकरे गुट के पास केवल 21, कांग्रेस के पास 16 और शरद पवार गुट के पास मात्र 10 विधायक बचे हैं। यह संख्या बल आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे और जीत की संभावनाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
सबसे बड़ा सवाल उद्धव ठाकरे की सीट को लेकर उठ रहा है। विधान परिषद चुनाव में एक सीट जीतने के लिए आवश्यक कोटे के हिसाब से विपक्षी गठबंधन (MVA) के पास पर्याप्त संख्या बल की कमी दिख रही है। तीनों विपक्षी दल मिलकर भी केवल एक सीट सुरक्षित रूप से जीतने की स्थिति में हैं। ऐसे में क्या कांग्रेस और शरद पवार गुट उद्धव ठाकरे के लिए अपनी दावेदारी छोड़ेंगे, या विपक्ष के भीतर ही खींचतान शुरू होगी? यदि गठबंधन में सहमति नहीं बनी, तो उद्धव ठाकरे के लिए सदन में वापसी करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
जैसे-जैसे नामांकन की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दोनों खेमों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। महायुति (BJP-शिंदे-अजीत पवार) अपनी अधिक से अधिक सीटें जीतने की रणनीति बना रही है, जबकि महा विकास अघाड़ी अपने अस्तित्व को बचाने की जुगत में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल नौ सीटों का नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता और विधायकों के बीच अपनी पकड़ दिखाने का एक बड़ा लिटमस टेस्ट भी है। अब देखना यह है कि 12 मई की शाम को जीत का सेहरा किसके सिर बंधता है।
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