Mahavatar Narsimha
Mahavatar Narsimha: साल 2025 भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक क्रांतिकारी वर्ष के रूप में दर्ज किया गया है। इस साल ‘सैयारा’ और ‘धुरंधर’ जैसी बड़े सितारों वाली फिल्मों ने पर्दे पर दस्तक दी और दर्शकों का प्यार भी बटोरा। लेकिन, इसी भीड़ के बीच एक ऐसी फिल्म ने पूरी इंडस्ट्री को सन्न कर दिया जिसमें न तो कोई नामी हीरो था और न ही कोई ग्लैमरस हीरोइन। हम बात कर रहे हैं 25 जुलाई को रिलीज हुई एनिमेटेड फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ की। इस फिल्म ने अपनी सादगी और भक्तिपूर्ण विषय के दम पर बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण बदल दिए और छप्परफाड़ कमाई कर सबको हैरान कर दिया।
‘महावतार नरसिम्हा’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने एनिमेटेड फिल्मों के प्रति भारतीय दर्शकों के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया। भगवान विष्णु के नरसिम्हा अवतार पर आधारित यह फिल्म दर्शकों के दिलो-दिमाग पर इस कदर छाई कि सालों बाद किसी भारतीय एनिमेटेड फिल्म के लिए सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं। क्या बच्चे और क्या बुजुर्ग, हर कोई इस पौराणिक गाथा के शानदार एनिमेशन और संगीत का मुरीद हो गया। फिल्म की भव्यता और कहानी के प्रस्तुतीकरण ने इसे एक कल्ट क्लासिक का दर्जा दिला दिया है।
जब ‘महावतार नरसिम्हा’ रिलीज हुई थी, तब बॉक्स ऑफिस पर अहान पांडे और अनीत पड्डा की फिल्म ‘सैयारा’ का जबरदस्त बोलबाला था। माना जा रहा था कि एक एनिमेटेड फिल्म बड़े सितारों की इस आंधी में टिक नहीं पाएगी। लेकिन, सबको चौंकाते हुए महज 40 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया। सफलता का आलम यह था कि इस फिल्म ने हॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ के कलेक्शन को भी पीछे छोड़ दिया, जो अपने आप में एक विश्व स्तरीय कीर्तिमान है।
इस फिल्म की विशाल सफलता के पीछे डायरेक्टर अश्विन कुमार का पाँच सालों का अटूट संघर्ष छिपा है। एक इंटरव्यू में अश्विन ने खुलासा किया कि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, तब किसी को इसके सफल होने पर भरोसा नहीं था। बजट की सीमाओं के बावजूद उन्होंने दृश्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया। अश्विन ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि इस फिल्म को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी के गहने बेच दिए और अपना घर तक गिरवी रख दिया था। यह फिल्म उनके लिए केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनके जीवन का सबसे बड़ा दांव थी।
अश्विन कुमार के अनुसार, फिल्म को तैयार करने में पाँच साल का समय लगा। उन्होंने बताया, “यह एक सपने जैसा था। बजट सीमित होने के कारण हमें कुछ सीन पर बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ी ताकि वे वैश्विक स्तर के लग सकें।” आज जब फिल्म 300 करोड़ के क्लब में शामिल हो चुकी है, तो यह केवल अश्विन की जीत नहीं, बल्कि भारतीय एनिमेशन इंडस्ट्री के लिए एक नई सुबह की तरह है। यह फिल्म साबित करती है कि यदि कहानी दमदार हो और इरादे मजबूत, तो बिना किसी बड़े सितारे के भी इतिहास रचा जा सकता है।
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