Mahavir Janmotsav
Mahavir Janmotsav: अहिंसा के अवतार और जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव अंबिकापुर शहर में अत्यंत श्रद्धा, हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। प्रति वर्ष की परंपरा को अक्षुण्ण रखते हुए इस वर्ष भी सकल जैन समाज ने एकजुट होकर इस महापर्व को यादगार बनाया। आयोजन की शुरुआत तड़के सुबह से ही हो गई थी, जब पूरा जैन समाज चोपड़ा पारा स्थित श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में एकत्रित हुआ। भक्तिमय वातावरण के बीच भगवान महावीर के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि इसने समाज की एकता और समरसता की एक अनुपम मिसाल भी पेश की।
उत्सव का शुभारंभ प्रातःकाल श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। सकल जैन समाज के सदस्यों द्वारा भगवान महावीर स्वामी का भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की गई। इसके पश्चात विद्वान पंडितों के सानिध्य में विधि-विधान से पूजन और अर्घ्य समर्पण का कार्यक्रम चला। श्रद्धालुओं ने पूरी तन्मयता के साथ भगवान के चरणों में वंदना की और विश्व शांति की कामना की। मंदिर परिसर में केसरिया ध्वजों और पुष्पों की सजावट ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया था। इस दौरान समाज के बच्चों और युवाओं में भी विशेष उत्साह देखा गया, जो अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ने का प्रयास कर रहे थे।
पूजन के पश्चात भगवान महावीर स्वामी के दिव्य उपदेशों और ‘जियो और जीने दो’ के उद्घोष के साथ एक भव्य एवं विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में अंबिकापुर के सकल जैन समाज की महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्वेत और रंगीन परिधानों में सजे श्रद्धालु भगवान की पालकी के आगे नृत्य और भजन कीर्तन करते चल रहे थे। मार्ग में जगह-जगह पर अन्य समुदायों और श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। कई स्थानों पर भक्तों ने भगवान महावीर के छायाचित्र पर श्रीफल अर्पित कर उनकी आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। यह शोभायात्रा शहर के मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी रही।
यह गरिमामय शोभायात्रा श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी। पालकी यात्रा चोपड़ा पारा से निकलकर घड़ी चौक पहुंची, जहां से देवीगंज मार्ग, महामाया चौक, थाना चौक, गुदरी चौक और जोड़ा पीपल मार्ग होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। पूरे रास्ते भर बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्त झूमते नजर आए। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। मार्ग में पड़ने वाले सभी चौराहों को तोरण द्वारों से सजाया गया था, जो उत्सव की भव्यता को चार चाँद लगा रहे थे।
शोभायात्रा के मंदिर वापस पहुँचने के बाद, मंदिर परिसर में ही सकल जैन समाज के लिए एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस सामूहिक भोज में समाज के सभी वर्गों ने एक साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की, जो वात्सल्य और अपनत्व का प्रतीक था। तत्पश्चात, सायंकाल भगवान महावीर स्वामी की भव्य महाआरती की गई। दीपों की रोशनी से जगमगाते मंदिर में सैकड़ों हाथों ने एक साथ आरती की थाली घुमाई, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक चर्चाओं के माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया गया।
इस महोत्सव की सफलता में समाज के पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विक्रांत जैन और श्वेतांबर जैन समाज के अध्यक्ष अनूप कोचेटा के नेतृत्व में पूरी टीम ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारीगण, महिला मंडल की ऊर्जावान सदस्याएं और प्रामाणिक पाठशाला के नन्हे छात्र-छात्राओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। सभी ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि भगवान महावीर का अहिंसा और करुणा का संदेश समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे।
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