Make Iran Great Again
‘Make Iran Great Again’:ईरान वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। खस्ताहाल आर्थिक स्थिति, कमरतोड़ महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने आम जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। पूरे देश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की आग फैली हुई है, जिसमें अब तक कई निर्दोष लोगों और नाबालिगों की जान जा चुकी है। इस मानवीय संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े तेवरों ने तेहरान की नींद उड़ा दी है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक दमन जारी रखा, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं बना रहेगा।
ईरान के प्रमुख शहरों में हो रहे ये प्रदर्शन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुके हैं। ईरानी रियाल की गिरती कीमत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की मौत ने आग में घी डालने का काम किया है। मानवाधिकार संगठनों ने नाबालिगों की मौत पर गहरी चिंता जताई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी संदर्भ में तेहरान को आगाह करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को मारना ईरान की पुरानी आदत रही है, लेकिन इस बार अमेरिका सक्रिय रूप से प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए आगे आ सकता है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब डोनाल्ड ट्रंप की एक तस्वीर सामने आई। इस तस्वीर में ट्रंप सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ ‘Make Iran Great Again’ लिखी हुई एक लाल टोपी पकड़े नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर तब ली गई जब वे एयर फ़ोर्स वन में फ्लोरिडा से वॉशिंगटन की यात्रा कर रहे थे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस कदम को बेहद उकसावे वाला और “खतरनाक” करार दिया है। आलोचकों का मानना है कि यह सीधे तौर पर ईरान में शासन परिवर्तन (Regime Change) का संकेत है, जिससे मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जिन्हें ट्रंप का करीबी और ईरान के प्रति सख्त नीति का समर्थक माना जाता है, ने हाल ही में एक साक्षात्कार में ईरानी सरकार को गिराने की वकालत की थी। इसी दौरान वह विवादित टोपी भी दिखाई दी थी। ट्रंप द्वारा इस टोपी के साथ फोटो खिंचवाना यह दर्शाता है कि उनकी विदेश नीति अब केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ईरान के भीतर एक बड़ा बदलाव देखना चाहते हैं। यह तस्वीर अमेरिकी विदेश नीति पर एक नई और गहन बहस का केंद्र बन गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले साल जून में, अमेरिका ने इजरायल के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन में ईरान के मुख्य परमाणु ठिकानों पर भारी बमबारी की थी। इस हमले का उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना था। इसके जवाब में ईरान ने भी दोहा स्थित अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइलें दागी थीं। हालांकि इस जवाबी कार्रवाई में कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ था, लेकिन भौतिक नुकसान काफी हुआ था। उस समय एक अस्थाई युद्धविराम ने मामले को शांत कर दिया था, लेकिन कड़वाहट आज भी बरकरार है।
राष्ट्रपति ट्रंप का रुख अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक है। उन्होंने खुले मंच से धमकी दी है कि अगर ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम या मिसाइल क्षमताओं को फिर से जीवित करने का साहस किया, तो परिणाम विनाशकारी होंगे। ट्रंप ने अपने संबोधन में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “अगर वे फिर से परमाणु निर्माण की कोशिश करते हैं, तो हमें उन्हें खत्म करना होगा। हम उन्हें पूरी तरह से खत्म कर देंगे।” ट्रंप की यह “जीरो टॉलरेंस” नीति संकेत देती है कि आने वाले समय में ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा सैन्य टकराव संभव है।
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