@thetarget365 : केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल को जाति आधारित जनगणना कराने की घोषणा की थी। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति आधारित जनगणना की मांग दोहराई है।
उन्होंने सर्वेक्षण के संचालन के लिए तीन सुझाव भी दिए। अपने पत्र में खड़गे ने 16 अप्रैल, 2023 को लिखे अपने पिछले पत्रों का जवाब नहीं देने के लिए सरकार की आलोचना की।
खड़गे ने कहा, “मुझे उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला।” फिर आज आप खुद स्वीकार कर रहे हैं कि यह मांग सामाजिक हित में है। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी को सभी राजनीतिक दलों से बात करने की भी सलाह दी।
खड़गे ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले का भी जिक्र किया। कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने ट्विटर पर खड़गे के दावे का समर्थन करते हुए एक पोस्ट साझा किया।
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2 मई को सीडब्ल्यूसी की बैठक के बाद मोदी को एक पत्र लिखा था।
मल्लिकार्जुन खड़गे की मोदी को तीन सलाह
सर्वेक्षण प्रश्नों का डिज़ाइन महत्वपूर्ण है। खड़गे ने प्रश्न निर्माण के लिए तेलंगाना मॉडल अपनाने की मांग की।सरकार से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए मनमाने ढंग से लगाई गई 50% आरक्षण सीमा को हटाने का आग्रह किया गया है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि अन्य राज्यों के कानूनों को भी संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। (संविधान की नौवीं अनुसूची केंद्रीय और राज्य कानूनों की सूची है जिन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।)
निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण प्रदान करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(5) को लागू करने के लिए कहा गया है, जिसे 20 जनवरी, 2006 को लागू किया गया था।
स्वतंत्रता के बाद देश में पहली जातीय जनगणना होगी।यह आजादी के बाद देश की पहली जाति आधारित जनगणना होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 अप्रैल को जाति जनगणना को मंजूरी दी।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कार्य मुख्य जनगणना के साथ ही किया जाएगा। विपक्षी दल जाति आधारित जनगणना की मांग कर रहे हैं। जाति गणना सितम्बर में शुरू हो सकती है।
जनगणना पूरी होने में एक वर्ष तक का समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में अंतिम जनगणना के आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में उपलब्ध होंगे।देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। यह हर 10 साल में की जाती है। अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।
इसका असर बिहार चुनाव में देखने को मिल रहा है।बिहार में सितंबर-अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होंगे। चुनाव में जातीय जनगणना एक बड़ा मुद्दा बन गई है। बिहार जाति आधारित जनगणना कराने वाला पहला राज्य है। इस वर्ष जनगणना सितम्बर में शुरू हो सकती है।
इस जनगणना का असर बिहार के जाति आधारित वोट बैंक पर देखने को मिल रहा है। इस फैसले का श्रेय लेने के लिए राजद और जदयू के बीच होड़ मची हुई है।मुख्यमंत्री नीतीश ने जहां प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया, वहीं लालू यादव ने सरकार की आलोचना की।
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