Netaji Citizenship Proof
Netaji Citizenship Proof: आज 23 जनवरी को देश भर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कोलकाता के रेड रोड स्थित सुभाष मेमोरियल स्टेज पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक बार फिर नेताजी के जन्मदिन को ‘नेशनल हॉलिडे’ (राष्ट्रीय अवकाश) घोषित न किए जाने पर दुख जताया। ममता बनर्जी ने कहा कि यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश की भावनाओं और नेताजी के बलिदान के सम्मान का विषय है, जिसे केंद्र सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान नेताजी के लापता होने से जुड़े अनसुलझे रहस्यों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि हम सभी को उनका जन्मदिन तो पता है, लेकिन उनकी मृत्यु की तारीख पर आज भी विवाद और रहस्य बना हुआ है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों नेताजी के गायब होने का रहस्य अभी तक खत्म नहीं हुआ है? उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने नेताजी से जुड़ी कई गोपनीय फाइलें सार्वजनिक की थीं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने केंद्र से मांग की कि इस महानायक के अंतिम दिनों को लेकर चल रही अटकलों को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
ममता बनर्जी के संबोधन का सबसे आक्रामक हिस्सा ‘SIR’ (सिलेक्टिव आइडेंटिटी वेरिफिकेशन) और नागरिकता के सबूत को लेकर था। उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करते हुए एक काल्पनिक लेकिन चुभने वाला सवाल पूछा। ममता ने कहा, “अगर नेताजी आज हमारे बीच जीवित होते, तो क्या मौजूदा सरकार उनसे भी उनकी नागरिकता का सबूत मांगती? क्या उन्हें भी सुनवाई के लिए बुलाया जाता और पूछा जाता कि वे भारतीय हैं या नहीं?” उन्होंने इस मुद्दे को सीधे तौर पर बंगाल की अस्मिता और पहचान के संकट से जोड़ दिया।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष रूप से गहरा रोष व्यक्त किया कि नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस को भी नागरिकता की सुनवाई (Hearing) के लिए बुलाया गया है। उन्होंने इसे न केवल परिवार का अपमान बताया, बल्कि इसे प्रशासनिक मनमानी का उदाहरण करार दिया। ममता बनर्जी के अनुसार, अगर नेताजी के वंशजों को अपनी भारतीयता साबित करने के लिए आयोग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, तो आम जनता की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर लोगों को प्रताड़ित कर रही है।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बंगाल के लगभग 1.38 करोड़ लोगों को वेरिफिकेशन के नाम पर बुलाया गया है, जबकि इससे पहले 58 लाख नामों को एकतरफा तरीके से सूची से बाहर कर दिया गया था। ममता ने कहा कि यह संख्या कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ तक पहुंच जाती है। उन्होंने सवाल किया कि “यदि राज्य की 7 करोड़ की आबादी में से 2 करोड़ लोगों को इस तरह बाहर कर दिया जाएगा, तो क्या बचेगा?” उन्होंने इसे भाजपा की एक राजनीतिक साजिश करार दिया।
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर अपनी सक्रियता का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कई बार पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान का अनुरोध किया है। उन्होंने शिकायत की कि सुनवाई के नाम पर बीमार व्यक्तियों और बुजुर्गों को मीलों दूर बुलाया जा रहा है, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक कष्ट हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह बंगाल के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगी और नागरिकता के नाम पर हो रहे इस कथित उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेंगी।
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