राष्ट्रीय

Mamata Banerjee:ममता बनर्जी का विवादित बयान: मोदी की तुलना ‘मिर्ज़ाफ़र’ से कर क्या बड़ा संदेश दिया?

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को त्रिनमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने धर्मतला में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को श्रद्धांजलि देने के बाद संविधान की प्रति हाथ में लेकर एक विरोध जुलूस निकाला। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) जीतेन्द्र कुमार पर तीखा हमला किया। ममता ने अपने भाषण में इन नेताओं को ‘मोदीबाबू’, ‘मिर्ज़ाफ़र’ और ‘कुर्सी बाबू’ कहकर संबोधित किया।

ममता का SIR पर हमला

ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि तीन महीने पहले मतदाता सूची में विशेष संशोधन क्यों नहीं किया गया और SIR अब चुनाव के बाद क्यों किया जा रहा है? उन्होंने पूछा कि असम, नागालैंड और त्रिपुरा में SIR क्यों नहीं किया गया, जबकि केवल बंगाल में ही इसे चुनाव से पहले लागू किया गया है।

ममता ने कहा, “पिछली बार बंगाल में SIR 2001 के चुनावों के बाद हुई थी। तब 2 साल तक कोई वोट नहीं था। अब अचानक कुर्सी बाबू मोदीबाबू और अमित शाह को खुश करने के लिए इतिहास क्यों रच रहे हैं?”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी का नाम मतदाता सूची से हटाया गया, तो राज्य सरकार संकट में आ सकती है। ममता ने कहा, “यदि माता-पिता के नाम नहीं हैं, तो क्या मुझे नए जन्म में यह साबित करना होगा कि मैं बंगाली नागरिक हूं? आयोग सूची में कई गड़बड़ियां कर रहा है। इनकी सजा कौन देगा?”

जुलूस और विरोध प्रदर्शन

ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी सहित लगभग 4 किलोमीटर पैदल चलीं और जोरसांको ठाकुरबाड़ी में पहुंचे। वहां उन्होंने सुप्रीम स्तर का भाषण देकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला किया। जुलूस में पार्टी के नेता, कार्यकर्ता, सांसद, विधायक, पार्षद, मतुआ समाज के प्रतिनिधि और कई हस्तियां शामिल थीं।ममता ने स्पष्ट किया कि SIR वोट के बाद क्यों नहीं किया जा सकता और क्यों केवल बंगाल में इसे लागू किया गया, यह चुनाव प्रक्रिया में केंद्र की राजनीतिक हस्तक्षेप की चिंता पैदा करता है।

भाजपा का जवाब

वहीं, BJP सांसद सुकांत मजूमदार ने ममता के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि “आयोग ने कहा है कि एक भी भारतीय का नाम बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। जो योग्य नहीं हैं, उन्हें ही बाहर रखा जाएगा। त्रिनमूल इतनी क्यों परेशान है?” उन्होंने कहा कि SIR चुनाव आयोग का निर्णय है और त्रिनमूल इसे लेकर सिर्फ डर और पैनिक फैलाने का काम कर रही है।

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। ममता बनर्जी ने इसे चुनावी रणनीति और केंद्र की राजनीतिक मंशा के रूप में पेश किया, जबकि भाजपा ने इसे निर्वाचन आयोग का अधिकार बताया। राज्य में आने वाले दिनों में SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक संघर्ष और विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है।

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