Mandla Mob Lynching
Mandla Mob Lynching: मध्य प्रदेश के मंडला जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ बिछिया थाना क्षेत्र के बरखेड़ा गांव में ‘बच्चा चोरी’ की झूठी अफवाह ने एक 17 वर्षीय किशोर की जान ले ली। इस विचलित करने वाले मामले में उग्र भीड़ ने एक मानसिक रूप से दिव्यांग बालक को बेरहमी से पीटा, जिसके बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उसका शव नेशनल हाईवे पर बरामद हुआ। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में फैलती हिंसक प्रवृत्तियों को भी उजागर करती है।
मृतक की शिनाख्त छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के ग्राम कुकरापानी निवासी अमरलाल (17) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अमरलाल मानसिक रूप से अस्वस्थ था और कुछ दिनों पहले अपने घर से लापता हो गया था। परिजन उसे तलाशते हुए बिछिया पहुंचे, जहाँ उन्होंने शव की पहचान की। एक दिव्यांग बच्चे का इस तरह क्रूरता का शिकार होना परिजनों के लिए असहनीय आघात है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में मॉब लिंचिंग जैसी क्रूरता साफ देखी जा सकती है। बरखेड़ा गांव में किसी ने अफवाह फैला दी कि क्षेत्र में बच्चा चोर सक्रिय हैं। जैसे ही ग्रामीणों ने अमरलाल को अकेले देखा, उसे बंधक बना लिया। वीडियो में दिख रहा है कि भीड़ उसे घेरकर गालियां दे रही है। कोई उसे डंडे से मार रहा है, तो कोई उसके बाल पकड़कर जमीन पर पटक रहा है। बालक की चीखें और रोना पत्थर दिल भीड़ को शांत नहीं कर पाया।
गांव के सरपंच द्वारा सूचना दिए जाने पर बिछिया पुलिस मौके पर पहुंची और लहूलुहान हालत में अमरलाल को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, यहाँ से कहानी में एक अजीब मोड़ आता है। पुलिस का दावा है कि अमरलाल अस्पताल से भाग गया था। सवाल यह उठता है कि एक घायल और पुलिस सुरक्षा में मौजूद बालक अस्पताल के स्टाफ और गार्ड्स की नजरों से बचकर कैसे निकल गया? क्या पुलिस ने इस लापरवाही की जांच की?
27 फरवरी की सुबह नेशनल हाईवे-30 पर ग्राम गुनेरा के पास अमरलाल का शव बरामद हुआ। एसपी रजत सकलेचा के मुताबिक, अस्पताल से भागने के बाद संभवतः किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। थाना प्रभारी रंजीत सैयाम ने बताया कि उसे सड़क पर गलत दिशा में चलते देखा गया था। पुलिस इसे एक सड़क दुर्घटना मान रही है, लेकिन मौत के समय और परिस्थितियों को लेकर अब भी कई अनसुलझे सवाल बरकरार हैं।
मारपीट का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। मंगलवार को पुलिस ने मारपीट करने वाले ग्रामीणों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही, अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है। एसपी ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और संदिग्ध दिखने पर पुलिस को सूचित करें। कानून हाथ में लेना गंभीर अपराध है।
इस पूरी घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यदि बालक को पुलिस ने भर्ती कराया था, तो उसके लापता होने की सूचना तुरंत क्यों नहीं प्रसारित की गई? क्या रात के समय अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे? इन सवालों के जवाब फिलहाल पुलिस के पास नहीं हैं।
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