ACB Raid
ACB Raid: छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक गुप्त सूचना और ठोस रणनीति के आधार पर मनेंद्रगढ़ नगरपालिका परिषद में दबिश दी। इस कार्रवाई ने नगर पालिका प्रशासन के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार की परतों को उधेड़ कर रख दिया है। एसीबी की इस छापेमारी से न केवल स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है, बल्कि उन अधिकारियों को भी सख्त संदेश मिला है जो अपनी कुर्सी का फायदा उठाकर जनता और ठेकेदारों का शोषण करते हैं।
एसीबी की टीम ने इस कार्रवाई के दौरान दो प्रमुख चेहरों को अपनी गिरफ्त में लिया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) इसहाक खान को उनके सरकारी आवास से पकड़ा गया, जबकि लेखापाल सुशील को उनके कार्यालय परिसर से हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच और ट्रैप की कार्रवाई में यह स्पष्ट हुआ है कि ये दोनों अधिकारी आपसी सांठगांठ के जरिए अवैध वसूली के खेल में शामिल थे। एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह के आचरण ने विभाग की छवि को धूमिल किया है।
इस पूरी कार्रवाई की जड़ में एक ठेकेदार का बकाया बिल था। मिली जानकारी के अनुसार, ठेकेदार ने नगरपालिका में किए गए कार्यों के भुगतान के लिए आवेदन किया था। लेकिन सीएमओ इसहाक खान और लेखापाल सुशील ने नियमानुसार भुगतान करने के बजाय अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी लाभ की मांग की। उन्होंने बिल पास करने की फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में 33 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। ठेकेदार ने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय कानून का रास्ता चुना और इसकी लिखित शिकायत अंबिकापुर एसीबी टीम से की।
शिकायत मिलते ही एसीबी की टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष ‘ट्रैप’ तैयार किया। योजना के मुताबिक, ठेकेदार को केमिकल युक्त नोट देकर अधिकारियों के पास भेजा गया। जैसे ही सीएमओ और लेखापाल ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, पहले से घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने उन्हें दबोच लिया। मौके पर ही उनके हाथ धुलवाए गए, जो गुलाबी हो गए, जिससे उनके द्वारा रिश्वत लेने की पुष्टि वैज्ञानिक रूप से भी हो गई। यह कार्रवाई इतनी त्वरित और सटीक थी कि अधिकारियों को संभलने या सबूत मिटाने का कोई मौका नहीं मिला।
इस सफल ऑपरेशन को स्थानीय अंबिकापुर एसीबी की टीम ने अंजाम दिया है। गिरफ्तारी के बाद, टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ ले गई है जहाँ उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि एसीबी अब उनके पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड्स और बैंक खातों की भी जांच कर सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्होंने पहले भी अन्य ठेकेदारों या आम जनता से इसी तरह धन उगाही की है। नगरपालिका के अन्य कर्मचारी भी अब जांच के दायरे में आ सकते हैं।
गिरफ्तारी के बाद अब दोनों अधिकारियों के निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने एसीबी की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी और काम करने के माहौल में सुधार होगा।
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