Manikrao Kokate Relief
Manikrao Kokate Relief: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी उथल-पुथल के बीच एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे के लिए राहत भरी खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 1995 के एक पुराने धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में कोकाटे को जमानत दे दी है। इसके साथ ही, अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उनकी सजा पर भी अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले ने कोकाटे के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
अदालत का यह फैसला माणिकराव कोकाटे द्वारा नैतिकता के आधार पर मंत्री पद छोड़ने के ठीक एक दिन बाद आया है। गुरुवार, 18 दिसंबर को सजा सुनाए जाने के बाद कोकाटे ने खेल, युवा कल्याण और अल्पसंख्यक मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपना इस्तीफा उपमुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख अजित पवार को सौंपा था। हालांकि, अब हाईकोर्ट से सजा पर रोक मिलने के बाद उनके समर्थक इसे उनकी नैतिक और कानूनी जीत के रूप में देख रहे हैं।
माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पार्टी की विचारधारा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “हमारे सहयोगी माणिकराव कोकाटे ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करते हुए अपना इस्तीफा मुझे सौंपा था। हमारी पार्टी का यह दृढ़ विश्वास है कि कानून का शासन किसी भी व्यक्ति या पद से ऊपर है।” पवार ने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक नैतिकता और न्यायपालिका के प्रति सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है, इसी सिद्धांत के तहत उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया था।
यह कानूनी विवाद लगभग तीन दशक पुराना है। 1995 में माणिकराव कोकाटे के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, निचली अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी पाया और दो साल की कैद की सजा सुनाई थी। इसी सजा के खिलाफ कोकाटे ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ से उन्हें अब राहत मिली है।
माणिकराव कोकाटे महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं। वे नाशिक जिले की सिन्नर विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। कोकाटे का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है और उनका इतिहास राजनीतिक निष्ठा बदलने के लिए भी जाना जाता है। वे क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ और जमीनी राजनीति के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्तमान फडणवीस सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण खेल एवं अल्पसंख्यक मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाए जाने का तकनीकी मतलब यह है कि उनकी सदस्यता और भविष्य में चुनाव लड़ने की योग्यता पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, मुख्य मामले की सुनवाई जारी रहेगी। जानकारों का मानना है कि यदि यह रोक नहीं लगती, तो उन्हें अपनी विधायकी भी गंवानी पड़ सकती थी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस्तीफा देने के बाद कोकाटे को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा या वे संगठन के लिए कार्य करेंगे।माणिकराव कोकाटे को मिली यह राहत न केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए अहम है, बल्कि अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के लिए भी राहत की बात है, जिसने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अपने एक मजबूत नेता का इस्तीफा स्वीकार कर ‘नैतिकता’ का संदेश देने की कोशिश की थी।
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