Manipur President Rule Ends
Manipur President Rule Ends: मणिपुर के राजनीतिक परिदृश्य में बुधवार (4 फरवरी 2026) को एक बड़ा बदलाव आया है। राज्य से करीब एक साल बाद राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) हटा लिया गया है। गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था, जिसके बाद 60 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था। अब शांति और राजनीतिक स्थिरता की बहाली के साथ ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, और राष्ट्रपति शासन हटने के बाद अब नई चुनी गई सरकार के पास जनता के कार्यों को आगे बढ़ाने का मौका होगा।
बीजेपी ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन करते हुए युमनाम खेमचंद सिंह पर भरोसा जताया है। मंगलवार (3 फरवरी 2026) को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इस बैठक में बीजेपी के 37 में से 35 विधायक मौजूद थे। चयन प्रक्रिया के दौरान पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी भी उपस्थित रहीं। नेता चुने जाने के बाद खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया है।
विधायक दल का नेता चुने जाने और राजभवन में दावा पेश करने के बाद युमनाम खेमचंद सिंह के बुधवार को ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है। राज्य में पिछले एक साल से जारी प्रशासनिक अनिश्चितता के बाद यह शपथ ग्रहण समारोह काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी नेतृत्व को उम्मीद है कि खेमचंद सिंह के अनुभव और उनकी स्वीकार्यता से राज्य में शांति व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
मणिपुर में वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति काफी मजबूत है। 60 सदस्यीय सदन में बीजेपी के पास अपने 37 विधायक हैं। याद दिला दें कि 2022 के चुनावों में बीजेपी ने 32 सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में जेडीयू के 6 में से 5 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे। अन्य दलों की बात करें तो नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के 6, नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के 5, कांग्रेस के 5, कुकी पीपुल्स अलायंस के 2 और निर्दलीय व अन्य विधायक शामिल हैं। आंकड़ों के लिहाज से नई सरकार के पास स्पष्ट बहुमत मौजूद है।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने की पृष्ठभूमि काफी तनावपूर्ण रही थी। 9 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका यह इस्तीफा मैतेई और कुकी समुदायों के बीच महीनों से जारी जातीय हिंसा और अस्थिरता के दबाव में आया था। इसके बाद केंद्र सरकार की सिफारिश पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। पिछले कुछ महीनों में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मैतेई, कुकी और सहयोगी दलों (NPF-NPP) के साथ कई दौर की वार्ता की, ताकि सरकार गठन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सके।
युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक कुशल ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने 2017 और 2022 में सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। उनके पास विधायी कार्यों का गहरा अनुभव है; वह 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) भी रह चुके हैं। इसके अलावा, बीरेन सिंह की दूसरी सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी। उनकी खेल भावना और प्रशासनिक अनुभव से अब मणिपुर को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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