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Manuel Frederick Passes Away: 1972 म्यूनिख ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट हॉकी गोलकीपर को खोकर भारतीय हॉकी में शोक की लहर

Manuel Frederick Passes Away: हॉकी जगत को एक दुखद समाचार मिला है। 1972 म्यूनिख ओलंपिक में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाले मनुएल फ्रेडरिक का 31 अक्टूबर को निधन हो गया। वह पिछले 10 महीनों से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से भारतीय हॉकी में शोक की लहर दौड़ गई है।

केरल के पहले ब्रॉन्ज मेडलिस्ट खिलाड़ी

मनुएल फ्रेडरिक का जन्म 20 अक्टूबर 1947 को केरल के कन्नूर जिले के बारनासीरी में हुआ था। उन्होंने भारत के लिए म्यूनिख ओलंपिक 1972 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर केरल का नाम रोशन किया। उनके बाद, केरल में जन्मे पीआर श्रीजेश ने भी टोक्यो 2020 और पेरिस ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनके खेल योगदान और उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए फ्रेडरिक को 2019 में युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा ‘ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।

हॉकी इंडिया ने जताया दुख

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा, “मनुएल फ्रेडरिक भारत के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर्स में से एक थे। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके प्रदर्शन ने कई खिलाड़ियों को प्रेरित किया जो भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखते हैं। हॉकी इंडिया की ओर से मैं उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। भारतीय हॉकी ने एक महान खिलाड़ी खो दिया है, लेकिन उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।”हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह हॉकी जगत के लिए बहुत दुखद दिन है। उन्होंने कहा, “मनुएल फ्रेडरिक की मेहनत और समर्पण, खासकर केरल जैसे गैर-पारंपरिक हॉकी राज्य से होने के बावजूद, अनगिनत युवाओं के लिए प्रेरणा थे। उनकी अनुशासन और देश सेवा को हमेशा याद रखा जाएगा। हम इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ खड़े हैं।”

मनुएल फ्रेडरिक की विरासत

मनुएल फ्रेडरिक केवल एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि भारतीय हॉकी के सुनहरे दौर के प्रतीक भी थे। उनका खेल कौशल और गोलकीपिंग में निपुणता नए खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रही। म्यूनिख ओलंपिक में उनके योगदान ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया।हॉकी प्रेमियों और खेल जगत के लिए यह एक बड़ा नुकसान है। हालांकि, उनका योगदान और खेल में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके द्वारा दिखाए गए समर्पण, मेहनत और देशभक्ति के मूल्य हमेशा भारतीय हॉकी में जीवित रहेंगे।

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