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Janmashtami 2025 : मथुरा और वृंदावन में लाखों श्रद्धालुओं ने मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

Janmashtami 2025 : देशभर में जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। विशेषकर मथुरा और वृंदावन में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ भगवान नंदलाल का विशेष पूजन किया गया।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 1008 कमल पुष्पों से अर्चन

मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा का 1008 कमल पुष्पों से अर्चन किया गया। निर्धारित समय पर, रात 11 बजकर 55 मिनट पर, 5 मिनट के लिए पट बंद कर दिए गए ताकि जन्म की तैयारी पूरी की जा सके। इसके बाद 12 बजकर 5 मिनट पर भगवान की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाया गया।

सोने से सजी चांदी की कामधेनु से अभिषेक

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भगवान का अभिषेक विशेष ढंग से किया गया। सोने से सजी चांदी की कामधेनु गाय से दूध अर्पित कर ठाकुरजी का स्नान कराया गया। इसके बाद भगवान को चांदी के कमल पर विराजमान कर 5 क्विंटल पंचामृत से विधिवत स्नान कराया गया। इस अनुष्ठान के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में गूंजता रहा।

वृंदावन में भी जन्मोत्सव का उल्लास

वृंदावन में भी जन्माष्टमी का उत्सव पूरे उल्लास के साथ मनाया गया। आधी रात के समय महाआरती और झूला उत्सव में श्रद्धालु झूम उठे। देश के कोने-कोने से लाखों लोग यहां पहुंचे। भक्तों ने भजन-कीर्तन के साथ नंदलाल का जन्मोत्सव मनाया और मंदिरों में दर्शन का लाभ लिया।

मथुरा-वृंदावन में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा और वृंदावन में 30 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और प्रमुख मार्गों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

ठाकुरजी की पोशाक में झलका शिल्पकारों का कौशल

जन्माष्टमी पर ठाकुरजी को अर्पित की जाने वाली विशेष पोशाक को मथुरा के शिल्पकारों ने छह महीने की मेहनत से तैयार किया। इस पोशाक में सोने-चांदी के तारों का प्रयोग किया गया है। खास बात यह रही कि इसमें इंद्रधनुष के सात रंगों का समावेश किया गया, जो भगवान के विराट स्वरूप और जीवन के विविध आयामों का प्रतीक है।

भक्तिरस में डूबा ब्रज क्षेत्र

पूरे ब्रज क्षेत्र में जन्माष्टमी की रात भक्तिरस से सराबोर रही। मंदिरों में लगातार भजन-कीर्तन होते रहे और श्रद्धालु रातभर ठाकुरजी के दर्शन के लिए उमड़ते रहे। भक्तों का उत्साह और श्रद्धा इस पावन पर्व को यादगार बना गई।

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