Mayawati on Reservation : बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जाति आधारित आरक्षण को समाप्त कर इसे केवल आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग का कड़ा विरोध किया है। रविवार को लखनऊ में उन्होंने कहा कि देश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक भेदभाव और लंबे समय से चली आ रही वंचना को दूर करने के उद्देश्य से की गई थी। उनके अनुसार, इसे केवल आर्थिक आधार पर बदलना सामाजिक न्याय के संवैधानिक उद्देश्य के खिलाफ होगा।
सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए बना आरक्षण
मायावती ने कहा कि संविधान में SC, ST और OBC वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान केवल आर्थिक कमजोरी को ध्यान में रखकर नहीं किया गया था। इसके पीछे सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, असमानता और अवसरों की कमी को दूर करने का उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि इन वर्गों को शिक्षा, रोजगार और प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए संवैधानिक संरक्षण जरूरी है।
समतामूलक समाज बनाने की अपील
बसपा प्रमुख ने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग करने वालों से अपील की कि वे ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे समानता पर आधारित समाज के निर्माण की संवैधानिक सोच को नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा राष्ट्र बनाने की आवश्यकता है, जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान और बराबरी का अधिकार मिले। उनके मुताबिक सामाजिक न्याय को कमजोर करने वाला कोई भी फैसला देश के व्यापक हित में नहीं होगा।
मायावती ने अंबेडकर के विचारों का दिया हवाला
मायावती ने अपने बयान में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जातिवाद को खत्म करना ही सच्ची देशभक्ति का महत्वपूर्ण आधार है। उनके अनुसार समाज में जातिगत भेदभाव कायम रहने तक वास्तविक सामाजिक समानता हासिल करना मुश्किल होगा। इसलिए राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों को जातिवाद के खिलाफ गंभीरता से काम करना चाहिए।
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी पर निशाना
आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए मायावती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर जब आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन हुए, तब राहुल गांधी या कांग्रेस का कोई प्रमुख नेता प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर अपना पक्ष समझाने नहीं पहुंचा। मायावती ने इस स्थिति को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के प्रति उसकी कथित आरक्षण विरोधी सोच सामने आती है।
EWS व्यवस्था को लेकर भी उठाए सवाल
मायावती ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लागू EWS आरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को इसका अपेक्षित लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग करने से सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
संवैधानिक प्रावधानों के सही क्रियान्वयन की मांग
बसपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि देश की व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार और जातिगत पूर्वाग्रहों के कारण आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि आजादी के कई दशकों बाद भी SC, ST और OBC समुदायों के लोगों को गरीबी, सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में आरक्षण को कमजोर करने के बजाय उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए।
आरक्षण विरोधियों को संरक्षण न देने की अपील
मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने वाले तत्वों को किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह विषय सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए सरकारों को किसी भी दबाव में आकर ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए, जिससे वंचित वर्गों के अधिकार प्रभावित हों।
राजनीतिक दलों से सस्ती राजनीति से बचने की अपील
बसपा प्रमुख ने सभी राजनीतिक दलों और आम लोगों से आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़े मामलों पर राजनीतिक लाभ के बजाय संविधान की मूल भावना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मायावती के बयान से साफ है कि उनकी पार्टी जाति आधारित आरक्षण को बनाए रखने और SC, ST तथा OBC वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के पक्ष में मजबूती से खड़ी है।
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