अंबिकापुर @thetarget365 सरगुजा संभागायुक्त जीआर चुरेंद्र ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में जुलाई माह के दौरान दो मरीजों की लापरवाही के कारण हुई मौत के मामले में गंभीर कार्रवाई की है। शिकायत के आधार पर गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कई डॉक्टरों और नर्सों को कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया है।
जांच दल ने डॉ. शेखर लाल कंवर, डॉ. शिवम सिंह चौहान, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. नूर अकरम अली, डॉ. भरत पटेल, पीजी जूनियर रेजिडेंट (प्रथम वर्ष), और नर्सिंग स्टाफ (ज्योति, माधुरी, गायत्री, रोशलीन) को उनके कार्यों में लापरवाही का दोषी ठहराया। जांच में यह पाया गया कि उनकी लापरवाही के चलते यह दुखद घटना हुई।
संभागायुक्त की कार्रवाई
दोषी पाए गए पीजी छात्र डॉक्टरों की प्रशिक्षण अवधि को छह माह बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही दोषी स्टाफ नर्सों की परिवीक्षा अवधि को एक वर्ष बढ़ाने का निर्णय यथावत रखा गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों पर सिफारिश:
सिविल सर्जन डॉ. जेके रेलवानी, संयुक्त संचालक डॉ. रमेश चंद्र आर्या, सहायक अधीक्षक डॉ. संटु बाघ और डॉ. जीके दामले के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक को अनुशंसा की गई है। जांच में पाया गया कि अस्पताल के प्रबंधन और कर्मचारियों पर इनका नियंत्रण प्रभावी नहीं था।
शिकायत और जांच की प्रक्रिया
शिकायतकर्ता आलोक दुबे ने डॉक्टरों और नर्सों की लापरवाही से मरीजों की मौत का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए संभागायुक्त ने जांच दल का गठन किया और निष्कर्षों के आधार पर सख्त कदम उठाए।
अस्पताल प्रबंधन पर सवाल
जांच रिपोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रशासनिक नियंत्रण की कमी के चलते यह घटना हुई। सरगुजा संभागायुक्त के इस कदम से अस्पताल में लापरवाही और कर्तव्यहीनता के मामलों पर सख्त संदेश दिया गया है।