Meghalaya border : मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट आर. एम. कुर्बाह ने आदेश जारी करते हुए कहा कि सीमा से लगे 1 किलोमीटर दायरे में लोगों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी रहेगी। यह कर्फ्यू अगले दो महीने तक लागू रहेगा।
जारी आदेश के अनुसार, अधिसूचित क्षेत्र (नोटिफाई जोन) में रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी व्यक्ति की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित होगी। प्रशासन का कहना है कि इस कदम का मकसद सुरक्षा को मजबूत करना और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर रोक लगाना है।
कर्फ्यू आदेश में साफ किया गया है कि इस अवधि में पांच या उससे अधिक लोगों का एक जगह इकट्ठा होना वर्जित होगा। साथ ही हथियार या किसी भी प्रकार के घातक वस्त्र जैसे चाकू, बंदूक, तलवार आदि ले जाने पर पूरी तरह पाबंदी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मेघालय और बांग्लादेश के बीच करीब 444 किलोमीटर लंबी सीमा है। अधिकारियों के मुताबिक, ईस्ट खासी हिल्स जिले में लगभग 7 से 8 किलोमीटर का इलाका ऐसा है जहां बाड़ (फेंसिंग) नहीं है। यही हिस्सा सबसे अधिक असुरक्षित माना जाता है और घुसपैठ की घटनाएं यहीं से अधिक होती हैं।
यह कर्फ्यू 8 अगस्त को हुई गंभीर घटना के बाद लगाया गया है। ईस्ट खासी हिल्स के बागली सेक्टर स्थित रोंगडांगाई गांव में कम से कम आठ हथियारबंद लोग बांग्लादेश से घुस आए थे। घुसपैठियों ने एक ग्रामीण पर चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और एक अन्य ग्रामीण को अगवा करने की भी कोशिश की थी।
घुसपैठ की इस घटना के बाद सीमा से सटे गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अक्सर रात के समय संदिग्ध गतिविधियां देखते हैं। कई बार हथियारबंद लोग खेतों और जंगलों से होकर गांव में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि लोग लगातार सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
अधिकारियों का कहना है कि ईस्ट खासी हिल्स जिले का खुला इलाका लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों और घुसपैठ के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। कर्फ्यू के साथ-साथ सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पुलिस की संयुक्त गश्त भी बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती गांवों में रात के समय पेट्रोलिंग तेज की गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
कर्फ्यू लागू होने से सीमावर्ती गांवों के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर किसान और मजदूर वर्ग, जिन्हें सुबह जल्दी खेतों में जाना पड़ता है, वे अब रात के समय बाहर नहीं निकल पा रहे। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी है और लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए।
राज्य सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्र की असुरक्षा को खत्म करने के लिए फेंसिंग का काम तेज किया जाएगा। साथ ही ग्रामीणों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस और सुरक्षा बल को देने की अपील की गई है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ की घटनाएं मेघालय प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं। 8 अगस्त की वारदात के बाद उठाया गया यह कदम सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश है। अब देखना होगा कि कर्फ्यू और सुरक्षा उपाय कितनी हद तक घुसपैठ पर रोक लगाने में सफल होते हैं।
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