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Meta Layoffs 2026: मेटा में फिर बड़ी छंटनी की तैयारी, 16,000 कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी; जानें क्या है जुकरबर्ग का ‘AI मास्टरप्लान’

Meta Layoffs 2026: दुनिया की दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) से एक बार फिर चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बदलती प्राथमिकताओं के बीच, मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाली यह कंपनी अपने कार्यबल में बड़े पैमाने पर कटौती करने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कम करने पर विचार कर रही है। इस संभावित कदम से टेक इंडस्ट्री में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह संकेत देता है कि सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियां अभी भी स्थिरता की तलाश में संघर्ष कर रही हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता भारी खर्च

मेटा द्वारा इस छंटनी के पीछे मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और इस तकनीक के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे पर होने वाला भारी खर्च बताया जा रहा है। कंपनी एआई मॉडल्स और डेटा सेंटर्स के निर्माण में अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इस वित्तीय बोझ को संतुलित करने और अपनी परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) को सुधारने के लिए कंपनी को मानव संसाधन में कटौती का कड़ा रास्ता चुनना पड़ सकता है। मेटा का लक्ष्य एक ऐसी टीम तैयार करना है जो एआई-संचालित भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक चुस्त और प्रभावी हो।

16,000 कर्मचारियों के करियर पर मंडरा रहा है खतरा

मेटा की हालिया कॉर्पोरेट फाइलिंग पर गौर करें तो 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी में लगभग 79,000 कर्मचारी कार्यरत थे। यदि कंपनी अपनी प्रस्तावित 20 प्रतिशत की कटौती की योजना पर आगे बढ़ती है, तो करीब 16,000 कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। हालांकि, प्रबंधन की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक तारीख या सूची की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कंपनी के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। यदि यह छंटनी होती है, तो यह 2022-23 के दौरान की गई रीस्ट्रक्चरिंग के बाद कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी मानी जाएगी।

पुराने अनुभवों और छंटनी के दौर की कड़वी यादें

यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है। इससे पहले नवंबर 2022 में, कंपनी ने लगभग 11,000 कर्मचारियों को निकाला था, जो उस समय के कुल कार्यबल का 13 प्रतिशत था। उसके बाद भी कंपनी ने ‘ईयर ऑफ एफिशिएंसी’ के नाम पर कई चरणों में छंटनी जारी रखी थी। विश्लेषकों का मानना है कि टेक कंपनियां अब “ग्रोथ एट एनी कॉस्ट” (किसी भी कीमत पर विकास) के मॉडल से हटकर लाभप्रदता और एआई एकीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिसका खामियाजा अक्सर मध्यम और निचले स्तर के कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।

भविष्य की रणनीति: एआई और डेटा सेंटर पर 600 अरब डॉलर का निवेश

मेटा का वर्तमान फोकस पूरी तरह से एआई पर केंद्रित हो गया है। कंपनी ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एआई शोधकर्ताओं को अपनी ‘सुपरइंटेलिजेंस टीम’ में शामिल करने के लिए भारी-भरकम पैकेज ऑफर किए हैं। साथ ही, कंपनी की योजना 2028 तक अत्याधुनिक डेटा सेंटर्स के निर्माण पर लगभग 600 अरब डॉलर खर्च करने की है। यह स्पष्ट है कि कंपनी मानव संसाधनों से पैसा बचाकर उसे भविष्य की तकनीकों में झोंक रही है। यह रणनीति लंबी अवधि में मेटा को प्रतिस्पर्धी बनाए रख सकती है, लेकिन वर्तमान में यह हजारों परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

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