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MGNREGA Job Card Deletion: मनरेगा का नया अवतार, 4.43 करोड़ जॉब कार्ड रद्द और योजना का बदला नाम

MGNREGA Job Card Deletion: केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान ग्रामीण रोजगार की दिशा में कई बड़े बदलावों और आंकड़ों की जानकारी साझा की है। राज्यसभा में सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर ‘सफाई अभियान’ चलाया गया है। इस प्रक्रिया के तहत देशभर में करोड़ों जॉब कार्डों को सिस्टम से हटा दिया गया है। इसके साथ ही, सरकार ने इस ऐतिहासिक योजना के स्वरूप और नाम में भी आमूल-चूल परिवर्तन करने का निर्णय लिया है, जिसका विपक्ष कड़ा विरोध कर रहा है।

MGNREGA Job Card Deletion: जॉब कार्डों की कटौती: बिहार और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कार्रवाई

ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि पिछले पांच वर्षों में देशभर में कुल 4.43 करोड़ जॉब कार्ड हटाए गए हैं। आंकड़ों के लिहाज से बिहार इस सूची में शीर्ष पर है, जहाँ अकेले 1.04 करोड़ कार्ड रद्द किए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है, जहाँ 90.4 लाख कार्डों को हटाया गया है। मंत्रालय के अनुसार, कुल हटाए गए कार्डों में अकेले बिहार और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 44% है। इनके अलावा ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में जॉब कार्ड डिलीट किए गए हैं।

MGNREGA Job Card Deletion: कार्ड हटाने के पीछे के तकनीकी और व्यावहारिक कारण

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जॉब कार्डों को हटाने की यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और नियमित जाँच का हिस्सा है। मंत्री ने बताया कि हटाए गए कार्डों में अधिकतर फर्जी, डुप्लीकेट या गलत जानकारी वाले थे। इसके अलावा, जिन परिवारों ने अपने मूल स्थान से स्थायी रूप से पलायन कर लिया है या जिन ग्राम पंचायतों का अब शहरीकरण हो चुका है, उनके कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही, उन मामलों में भी कार्ड हटाए गए जहाँ परिवार के एकमात्र सदस्य की मृत्यु हो चुकी थी। प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के लिए सरकार ने 25 जनवरी 2025 को एक ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) भी जारी की है।

मनरेगा अब बना ‘VB G RAM G’: बदला गया योजना का नाम

संसद के इसी शीतकालीन सत्र में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), 2025’ (VB-जी राम जी) करने वाला बिल पास कर दिया है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पेश किया गया यह विधेयक अब पुराने मनरेगा कानून की जगह लेगा। नए बिल का उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है। इस नए ढांचे के तहत सबसे बड़ी राहत यह दी गई है कि अब रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।

1. राज्यवार हटाए गए जॉब कार्ड (टॉप 6 राज्य)

बिहार इस सूची में सबसे ऊपर है, जहाँ 1 करोड़ से अधिक कार्ड रद्द किए गए हैं।

रैंक राज्य हटाए गए जॉब कार्ड (लगभग)
1 बिहार 1.04 करोड़
2 उत्तर प्रदेश 91.48 लाख
3 पश्चिम बंगाल 83.36 लाख (2022-23 में सर्वाधिक)
4 ओडिशा 44.07 लाख
5 मध्य प्रदेश 37.90 लाख
6 आंध्र प्रदेश 36.14 लाख

विपक्ष का तीखा हमला: प्रियंका गांधी और विपक्षी दलों का विरोध

योजना के नाम में बदलाव और जॉब कार्डों की कटौती को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर ‘VB G RAM G’ विधेयक के खिलाफ आवाज उठाई। प्रियंका गांधी का कहना है कि मनरेगा का नाम बदलना और उसे नया रूप देना वास्तव में इस कानून को कमजोर करने की साजिश है, जिससे करोड़ों गरीबों के रोजगार के अधिकार पर संकट मंडरा सकता है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने भी इस विधेयक के विरोध में संसद परिसर में रातभर धरना देकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

निष्कर्ष: ग्रामीण रोजगार की नई दिशा और चुनौतियाँ

सरकार जहाँ इसे ग्रामीण विकास का नया और आधुनिक ढांचा बता रही है, वहीं आलोचकों का मानना है कि ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाना और कार्डों की छंटनी करना जमीनी स्तर पर रोजगार के अवसरों को कम कर सकता है। हालांकि, 125 दिनों के कार्य की गारंटी एक सकारात्मक कदम दिखती है, लेकिन इसका सफल क्रियान्वयन और पारदर्शिता आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, विकसित भारत के विजन के साथ जुड़ी यह नई योजना ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में कितना बदलाव लाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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