अंबिकापुर नगर निगम में MIC की सूची जारी, 11वें सदस्य को लेकर बढ़ी सियासी सरगर्मी

अंबिकापुर @thetarget365 नगर निगम अंबिकापुर में बहुप्रतीक्षित मेयर इन कौंसिल (MIC) की सूची सोमवार को महापौर मंजूषा भगत ने जारी कर दी। सुबह 10 सदस्यों की सूची सामने आई, लेकिन देर शाम सोशल मीडिया पर 11वें सदस्य को बधाई देने के पोस्ट वायरल होने लगे। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है कि आखिर यह 11वां सदस्य कौन है और उसे कौन सा विभाग दिया गया है?

महापौर मंजूषा भगत द्वारा जारी MIC की सूची

11वें सदस्य की गुत्थी और राजनीतिक अटकलें

जहां आधिकारिक सूची में 10 सदस्य घोषित किए गए हैं, वहीं सोशल मीडिया पर 11वें सदस्य को बधाई संदेश वायरल हो रहे हैं। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि क्या यह कोई प्रशासनिक भूल है या फिर संगठन के दबाव में किसी अतिरिक्त सदस्य को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है?

11 वें सदस्य को SLRM सेंटर का प्रभारी बनाये जाने की कवायद है। यानी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के प्रभारी का पर पहले दिन से ही काट दिया जा रहा है। SLRM सेंटर स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आता है। कहीं स्वच्छता के क्षेत्र में अंबिकापुर को इनाम मिलने पर लेने की होड़ मत मच जाए।

भाजपा के अंदरखाने में हलचल

नगर निगम चुनाव में महापौर सहित 32 पार्षदों के साथ भाजपा ने बहुमत हासिल किया है। ऐसे में MIC के गठन में संतुलन बनाए रखना संगठन के लिए चुनौती साबित हो रहा है। वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी से असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

आलोक दुबे और पूर्व एमआईसी सदस्य विजय सोनी को नहीं मिली जगह, संगठन का दबाव भारी

भाजपा की बहुमत वाली नगर सरकार में पार्टी के वरिष्ठ नेता और फायर ब्रांड छवि के पार्षद आलोक दुबे को MIC में शामिल नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार, महापौर मंजूषा भगत उन्हें अपनी टीम में रखना चाहती थीं, लेकिन संगठन के दबाव के चलते उनका नाम सूची में नहीं जोड़ा गया। इसी प्रकार पूर्व में एमआईसी सदस्य की भूमिका निभा चुके पार्षद विजय सोनी को भी दरकिनार कर दिया गया है। यह फैसला भाजपा के आंतरिक समीकरणों को दर्शाता है, जहां संगठन की सहमति के बिना किसी को भी प्रमुख जिम्मेदारी नहीं दी जा रही।

नगर निगम अधिनियम के तहत 10 सदस्य होते हैं MIC में

छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 37 के अनुसार, मेयर-इन-कौंसिल का गठन महापौर द्वारा किया जाता है। अधिनियम के तहत, 10 सदस्यों की नियुक्ति निगम के निर्वाचित पार्षदों में से की जाती है, जिनमें महिला, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।

MIC के लिए नाम की स्वीकृति कोर ग्रुप से ना लिए जाने और कई योग्य, शिक्षित व अनुभवी लोगों को दरकिनार कर चहेतों को तरजीह दिए जाने को लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रदेश नेतृत्व को शिकायत किए जाने की भी चर्चा है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 11वें सदस्य की गुत्थी कब और कैसे सुलझती है, और क्या पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए कोई नया समीकरण बनाया जाता है?

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