Middle East Crisis: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच, भारत सरकार ने घरेलू मोर्चे पर एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम जनता को राहत देने के लिए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर भारतीय रसोइयों पर न पड़े, इसके लिए केरोसीन (मिट्टी के तेल) की आपूर्ति को युद्ध स्तर पर बढ़ाया जा रहा है। यह कदम देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

नियमों में ढील: 21 राज्यों में केरोसीन की सुगम उपलब्धता
सरकार ने मौजूदा संकट की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम से जुड़े सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी रूप से बड़ी छूट दी है। इस विशेष निर्णय के तहत देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घरेलू जरूरतों के लिए केरोसीन की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इन राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली (NCT), हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के नागालैंड जैसे दुर्गम क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी गई है। साथ ही अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी जैसे द्वीप समूहों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सप्लाई सुचारू की जा रही है।
अब पेट्रोल पंप भी बनेंगे केरोसीन के केंद्र: 60 दिनों की विशेष योजना
वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSUs) को यह अनुमति दी गई है कि वे अपने रिटेल आउटलेट्स यानी पेट्रोल पंपों के माध्यम से भी केरोसीन की बिक्री कर सकेंगी। यह नई व्यवस्था अगले 60 दिनों तक प्रभावी रहेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राशन की दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना और मध्यम व निम्न आय वर्ग के लोगों को आसानी से ईंधन उपलब्ध कराना है। इससे न केवल कालाबाजारी पर लगाम लगेगी, बल्कि सुदूर इलाकों में रहने वाले नागरिकों को भी अपने पास के पेट्रोल पंप से ही खाना बनाने और रोशनी के लिए तेल मिल सकेगा।
स्टॉक सीमा में बढ़ोतरी: सप्लाई चेन को मिलेगी मजबूती
आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए सरकार ने डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा को भी संशोधित किया है। नई अनुमति के अनुसार, प्रत्येक रिटेल यूनिट अब 2500 लीटर तक केरोसीन का स्टॉक अपने पास सुरक्षित रख सकेगी। स्टॉक की इस सीमा को बढ़ाने से स्थानीय स्तर पर मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर कम होगा। यदि किसी क्षेत्र में अचानक मांग बढ़ती है, तो डीलर के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद होगा, जिससे ‘आउट ऑफ स्टॉक’ जैसी स्थितियों से बचा जा सकेगा। यह प्रावधान सप्लाई चेन को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ डीलरों के लिए भी परिचालन को आसान बनाएगा।
कानूनी प्रावधान: पेट्रोलियम अधिनियम की विशेष शक्तियों का प्रयोग
भारत सरकार का यह निर्णय कानूनी रूप से ‘पेट्रोलियम अधिनियम 1934’ और ‘पेट्रोलियम नियम 2002’ के तहत लिया गया है। इन कानूनों में यह स्पष्ट प्रावधान है कि विशेष परिस्थितियों या राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थितियों में सरकार को मौजूदा नियमों में छूट देने का पूर्ण अधिकार है। मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालातों को सरकार ने ‘विशेष परिस्थिति’ माना है, जहाँ वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वैधानिक शक्ति का उपयोग करते हुए मंत्रालय ने लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाया है ताकि आम जनता तक बिना किसी कानूनी अड़चन के राहत पहुँच सके।
समाज के अंतिम छोर तक पहुँचेगा लाभ
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ समाज के उस वर्ग को होगा जो आज भी पूरी तरह से एलपीजी (LPG) पर निर्भर नहीं है या जहाँ सिलेंडर की पहुँच कठिन है। ग्रामीण इलाकों और झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए केरोसीन आज भी खाना पकाने और प्रकाश का एक सस्ता और सुलभ जरिया है। गैस की कीमतों में वैश्विक दबाव के कारण होने वाली संभावित बढ़ोतरी से भी यह कदम गरीब परिवारों को सुरक्षा प्रदान करेगा। सरकार की इस दूरदर्शी सोच ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि वैश्विक युद्ध के बादल भले ही मंडरा रहे हों, लेकिन भारत के आम नागरिक की बुनियादी जरूरतें प्रभावित नहीं होंगी।

















