Energy Shock
Energy Shock: मध्य पूर्व (Middle East) की सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक ताकत, यानी वहां के विशाल तेल और गैस भंडार, अब भीषण युद्ध की भेंट चढ़ रहे हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद, तेहरान ने कड़ा पलटवार करते हुए पड़ोसी देशों के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इस जबरदस्त तनाव के कारण सऊदी अरब और कतर जैसे दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों को अपनी इकाइयों में कामकाज पूरी तरह बंद करना पड़ा है। इस स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक बड़े ऊर्जा संकट का काला साया डाल दिया है, जिससे आने वाले समय में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा बढ़ गया है।
सऊदी अरब की रीढ़ मानी जाने वाली सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी, रास तनूरा, ईरानी ड्रोन हमलों का शिकार हुई है। सुरक्षा कारणों और क्षति के आकलन के लिए यहां सारा काम तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। यह रिफाइनरी प्रतिदिन लगभग 5.50 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती थी और सऊदी के मुख्य एक्सपोर्ट टर्मिनल के रूप में काम करती थी। सऊदी अरामको का यह फैसला वैश्विक बाजार के लिए किसी सदमे से कम नहीं है, क्योंकि सऊदी अरब अकेले दुनिया के कुल तेल उत्पादन में 1.08 करोड़ बैरल प्रतिदिन का योगदान देता है।
दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाले देश कतर ने भी सुरक्षा के मद्देनजर अपना एलएनजी (LNG) उत्पादन रोक दिया है। ईरानी ड्रोनों ने कतर के प्रमुख मेसाईद इंडस्ट्रियल जोन को निशाना बनाया, जिससे वहां की पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बंदी का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत देखने को मिला, जहां गैस की कीमतें मात्र कुछ घंटों में 46 प्रतिशत तक उछल गईं। यह बढ़ोत्तरी उन यूरोपीय और एशियाई देशों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह कतर पर निर्भर हैं।
पश्चिमी एशिया में जारी इस खूनी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। सोमवार को ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 13 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया, जिससे भाव 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसा व्यापारिक मार्ग बाधित रहता है, तो कच्चे तेल की कीमत बहुत जल्द 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाएगी।
युद्ध केवल ईरान या खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। इजरायल ने अपनी सबसे बड़ी लेविथान और करीश गैस फील्ड्स के साथ-साथ हाइफा रिफाइनरी में भी उत्पादन बंद कर दिया है। वहीं, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र से तुर्की जाने वाले करीब 2 लाख बैरल तेल का निर्यात भी एहतियातन रोक दिया गया है। उधर, ईरान का खुद का खार्ग आइलैंड, जहां से देश का 90 प्रतिशत कच्चा तेल निर्यात होता है, धमाकों से गूंज उठा है। पूरी दुनिया अब एक ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रही है जहां ईंधन की भारी किल्लत और आर्थिक मंदी का खतरा वास्तविक नजर आ रहा है।
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