Middle East war 2026: मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक परिस्थितियां एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई हैं। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की बढ़ती संभावनाओं ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को एक तरफ स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने रणनीतिक रूप से अपनी सैन्य मौजूदगी को खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है। बीते 24 घंटों के भीतर अमेरिका ने ईरान की सीमा के नजदीक 50 से अधिक अत्याधुनिक फाइटर जेट्स भेजे हैं, जो इस क्षेत्र में एक बड़े युद्ध की दस्तक दे रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की ‘सबक सिखाने’ की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु वार्ता के दूसरे दौर की शुरुआत से पहले ही ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि उसे अपने रुख का भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी अमेरिका को किसी भी हिमाकत का करारा जवाब देने की बात कही है। अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट ‘Axios’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन मिडिल ईस्ट में एक ऐसे सैन्य अभियान की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिसकी भयावहता का अंदाजा अधिकांश अमेरिकियों को भी नहीं है। यह योजना केवल सांकेतिक हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक युद्ध की तैयारी है।
इजरायल के साथ मिलकर ईरान को घेरने की योजना
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो यह कई हफ्तों तक चल सकती है। इस बार अमेरिका अकेले नहीं, बल्कि इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाएगा। सूत्रों का कहना है कि यह हमला ईरान की सत्ता संरचना और उसके परमाणु बुनियादी ढांचे के लिए पिछले साल हुए हमलों से कहीं अधिक विनाशकारी साबित होगा। पिछले वर्ष अमेरिका ने केवल भूमिगत परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया था, लेकिन इस बार का संभावित हमला पूरे क्षेत्र की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति को बदल सकता है।
वार्ता में प्रगति और गहरे मतभेद: जेडी वेंस का बयान
सैन्य दबाव के बीच कूटनीतिक रास्ते भी खुले रखने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप के विशेष सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने जिनेवा में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ करीब तीन घंटे तक गहन चर्चा की। हालांकि दोनों पक्षों ने कुछ प्रगति की बात स्वीकार की है, लेकिन बुनियादी मुद्दों पर मतभेद अभी भी बहुत गहरे हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘फॉक्स न्यूज’ को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में एक समझौता चाहते हैं, लेकिन उन्होंने कुछ ऐसी ‘रेड लाइन्स’ तय की हैं, जिनसे वे पीछे नहीं हटेंगे। वेंस के मुताबिक, ईरान के लिए उन सीमाओं को स्वीकार करना फिलहाल मुश्किल लग रहा है।
युद्ध की 90% संभावना और सैन्य लामबंदी
युद्ध की तैयारियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 150 से अधिक अमेरिकी मिलिट्री कार्गो विमानों ने पिछले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट में हथियारों और गोला-बारूद की बड़ी खेप पहुंचाई है। तैनात किए गए बेड़े में F-35, F-22 और F-16 जैसे दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमान शामिल हैं। सीनेटर लिंडसे ग्राहम और कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हमले की घड़ी नजदीक आ चुकी है। ट्रंप के एक वरिष्ठ सलाहकार ने यहां तक दावा किया है कि अगले कुछ हफ्तों के भीतर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने की संभावना 90 प्रतिशत तक है।


















