Middle East War
Middle East War : अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के सीजफायर (संघर्ष विराम) को अभी कुछ ही घंटे बीते थे कि शांति की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। ताजा जानकारी के अनुसार, समझौते के बावजूद दोनों ओर से एक बार फिर भीषण हमलों की खबरें सामने आई हैं। संघर्ष विराम के इस उल्लंघन ने न केवल कूटनीतिक प्रयासों को विफल कर दिया है, बल्कि क्षेत्रीय तनाव को भी नए स्तर पर पहुँचा दिया है। इस टकराव के तुरंत बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला ठप होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।
इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मौजूदा हालात पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि उनके देश का सैन्य अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। नेतन्याहू ने एक प्रेस संबोधन में कहा कि इजरायल का “मिशन अभी अधूरा” है और यदि आवश्यक हुआ तो युद्ध को पूरी शक्ति के साथ दोबारा शुरू किया जा सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि सीजफायर पर उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आपसी सहमति बनी थी, लेकिन इजरायल के कुछ रणनीतिक लक्ष्य अभी भी शेष हैं। नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि इन लक्ष्यों को या तो कूटनीतिक समझौतों के जरिए हासिल किया जाएगा, और यदि समझौता विफल रहता है, तो युद्ध के जरिए परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे।
इजरायली प्रधानमंत्री ने ईरान की सैन्य शक्ति को लेकर एक बड़ा दावा भी किया है। नेतन्याहू के अनुसार, इजरायली वायुसेना और खुफिया तंत्र ने ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता को काफी हद तक नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान की ओर से जो भी छिटपुट हमले हो रहे हैं, वे उसके पास बचे हुए पुराने मिसाइल स्टॉक का हिस्सा हैं। इजरायल का मानना है कि उसने लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले ईरानी बुनियादी ढांचे को भारी चोट पहुंचाई है, जिससे भविष्य में ईरान की आक्रमण करने की शक्ति सीमित हो जाएगी। हालांकि, स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि होना अभी बाकी है।
दूसरी ओर, तेहरान ने इजरायल के इन दावों और हमलों को सिरे से खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर लेबनान (Lebanon) पर इजरायल के हमले तुरंत नहीं रोके गए, तो पूरे क्षेत्र में इजरायल को जोरदार और अभूतपूर्व जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस गंभीर स्थिति पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी फोन पर विस्तृत चर्चा की। ईरानी नेतृत्व ने सीजफायर उल्लंघन की कड़ी आलोचना की है और क्षेत्र के मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की है।
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशक्यान ने इस दौरान अमेरिका की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका पर भरोसा न जताते हुए कहा कि वाशिंगटन का “धोखा देने का पुराना इतिहास” रहा है, इसलिए उस पर विश्वास करना एक बड़ी भूल होगी। ईरान का मानना है कि सीजफायर केवल इजरायल को फिर से संगठित होने का समय देने की एक साजिश थी। सीजफायर के बावजूद जारी यह बयानबाजी, सीमा पर होते हमले और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने जैसे जवाबी कदम यह स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट के हालात बेहद अस्थिर हैं। किसी भी समय यह छिटपुट संघर्ष एक भीषण क्षेत्रीय महायुद्ध में तब्दील हो सकता है।
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