Middle East War
Middle East war news: मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक परिस्थितियां एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गई हैं। क्षेत्रीय संघर्ष अब दो प्रमुख मोर्चों पर बंटता नजर आ रहा है। एक तरफ यमन को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे पुराने सहयोगियों के बीच दरार गहरी हो गई है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी ने ईरान के साथ तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके देश के खिलाफ किसी भी सैन्य दुस्साहस का अंजाम हमलावर के लिए अत्यंत विनाशकारी होगा।
फ्लोरिडा में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई उच्च स्तरीय मुलाकात ने वैश्विक हलचल तेज कर दी है। इस बैठक के बाद ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि तेहरान ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को तत्काल नियंत्रित नहीं किया, तो उसे पिछले कार्यकाल से भी कहीं अधिक गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी परमाणु क्षमताओं का विस्तार करता है, तो अमेरिका इजरायल द्वारा की जाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करेगा।
ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया को आगाह किया कि ईरान किसी भी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बिना नाम लिए अमेरिका और इजरायल पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान का प्रतिशोध इतना दर्दनाक होगा कि हमलावर को अपनी रणनीति पर पछतावा होगा। ईरान के परमाणु ठिकानों पर बढ़ते खतरे के बीच तेहरान ने अपनी मिसाइल डिफेंस यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है।
मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव का आधार जून 2025 में हुई वह जंग है, जिसने पूरी दुनिया को दहला दिया था। 13 जून 2025 को इजरायल ने ईरान के कथित परमाणु ठिकानों पर भीषण बमबारी की थी, जो लगातार 12 दिनों तक जारी रही। इसके बाद 22 जून को अमेरिका ने भी नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे रणनीतिक स्थलों को निशाना बनाया। कुल 24 दिनों तक चली इस विनाशकारी जंग के बाद सीजफायर हुआ था, लेकिन हालिया बयानबाजी ने उस शांति समझौते को खतरे में डाल दिया है।
यमन को लेकर भी स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमला कर यूएई से आए सैन्य वाहनों और हथियारों की खेप को नष्ट कर दिया। सऊदी का दावा है कि ये हथियार अलगाववादी समूह ‘सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (STC) के लिए भेजे गए थे। सऊदी ने यूएई के इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। इस घटना ने यमन युद्ध में अब तक सहयोगी रहे सऊदी और यूएई को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की ‘प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल’ (PLC) ने बढ़ते आंतरिक विद्रोह को देखते हुए देश में 72 घंटों के लिए आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया है। पीएलसी ने यूएई के साथ अपने संयुक्त रक्षा समझौते को रद्द करते हुए देश की सभी हवाई, समुद्री और जमीनी सीमाओं पर पूर्ण नाकाबंदी का आदेश दिया है। दक्षिणी अलगाववादियों द्वारा हदरामौत और महरा प्रांतों पर कब्जे के बाद यमनी सरकार के पूरी तरह बिखरने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका है।
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