Bihar Politics
Bihar Politics: बिहार की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। मंगलवार को दिल्ली में आयोजित पार्टी की महत्वपूर्ण बैठक में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष घोषित किया गया। यह चौथा अवसर है जब नीतीश कुमार के कंधों पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, इस औपचारिक घोषणा के समय नीतीश कुमार स्वयं दिल्ली में उपस्थित नहीं थे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगा दी।
नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। वे हाल ही में 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में विजयी हुए हैं और सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 10 अप्रैल से विधिवत शुरू होने वाला है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि राज्यसभा जाने से पहले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो बिहार में सत्ता का समीकरण बदल जाएगा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई में नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
जब दिल्ली में नीतीश कुमार को अध्यक्ष चुने जाने का ऐलान हो रहा था, तब उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए गए। इस पर जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। संजय झा ने बताया कि नीतीश कुमार वर्तमान में जनता के बीच हैं और विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि उनका अध्यक्ष बनना संगठन को मजबूती देगा, खासकर तब जब बिहार में बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक परिवर्तन की संभावना दिखाई दे रही है।
नीतीश कुमार के इस नए सफर पर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तंज कसने में देरी नहीं की। लालू प्रसाद यादव की पुत्री और सांसद मीसा भारती ने नीतीश कुमार को बधाई देते हुए ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर उन्हें निशाने पर लिया। मीसा ने कहा कि अब जबकि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने जेडीयू की सदस्यता ले ली है, तो उम्मीद है कि मुख्यमंत्री भविष्य में परिवारवाद पर बयानबाजी बंद करेंगे। चर्चा है कि निशांत कुमार को आगामी एनडीए सरकार में उपमुख्यंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद मिल सकता है।
मीसा भारती ने एक और चौंकाने वाला बयान देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में दिल्ली आएं, तो उन्हें केंद्र में बड़ी भूमिका मिलनी चाहिए। मीसा ने कहा, “मैं चाहती हूं कि नीतीश कुमार को उपप्रधानमंत्री का पद दिया जाए।” पिछले कुछ समय से एनडीए के भीतर उन्हें ‘कन्वेनर’ (संयोजक) बनाने की चर्चा भी होती रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र की राजनीति में नीतीश का कद कितना बड़ा होता है।
नीतीश कुमार का जेडीयू अध्यक्ष बनना और साथ ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित होना, बिहार की सत्ता में एक बड़े ‘शिफ्ट’ का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि वे अपनी पार्टी पर पकड़ मजबूत रखते हुए दिल्ली में एनडीए के भीतर अपनी भूमिका को विस्तार देना चाहते हैं। बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनने की स्थिति में जेडीयू और बीजेपी के बीच शक्ति संतुलन कैसे बना रहेगा, यह आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा।
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