SIR Controversy : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को अपने पद से हट जाना चाहिए और अब उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया को रोकने की भी मांग की।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर डीएमके की आपत्ति
स्टालिन ने कहा कि डीएमके और अन्य विपक्षी दल शुरुआत से ही SIR के तहत मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने के फैसले का विरोध करते रहे हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में सुधार के नाम पर की जा रही इस प्रक्रिया को लेकर पार्टी ने लगातार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR से जुड़ी प्रक्रिया में कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।
SIR में गड़बड़ियों का स्टालिन ने लगाया आरोप
डीएमके प्रमुख ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं थीं और इसके चलते कुछ राज्यों में व्यापक स्तर पर असंतोष देखने को मिला। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल का उल्लेख किया। स्टालिन के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े मामलों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
अखबार की रिपोर्ट का हवाला देकर उठाए चुनाव परिणामों पर सवाल
स्टालिन ने एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सामने आए दस्तावेजों और दावों ने SIR प्रक्रिया के बाद हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों को लेकर भी संदेह पैदा किया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
चुनाव आयोग में राजनीतिक दखल का लगाया आरोप
एमके स्टालिन ने कहा कि दो मौजूदा निर्वाचन आयुक्तों की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बाद आयोग के भीतर संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और पारदर्शिता प्रभावित हुई है। हालांकि, ये स्टालिन और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिन्हें निर्वाचन आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
SIR प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग
डीएमके अध्यक्ष ने मांग की कि SIR की प्रक्रिया को तत्काल रोक दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सभी सवालों का निष्पक्ष समाधान नहीं होता, तब तक इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। स्टालिन ने चुनाव आयोग के भीतर हाल की घटनाओं की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग भी की।
जिम्मेदार लोगों पर जवाबदेही तय करने की मांग
स्टालिन ने कहा कि निर्वाचन आयोग के भीतर जो भी घटनाक्रम सामने आया है, उसकी पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच के बाद यदि किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। डीएमके की ओर से यह मांग ऐसे समय उठाई गई है जब SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने सर्वसम्मति से फैसले लेने की बात कही
वहीं, निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन आरोपों से अलग तस्वीर पेश की है। आयोग की ओर से कहा गया है कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव और अलग-अलग विचार आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार SIR समेत सभी फैसले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR विवाद में आमने-सामने विपक्ष और चुनाव आयोग
SIR को लेकर अब विपक्षी दलों और निर्वाचन आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर स्टालिन जैसे नेता प्रक्रिया रोकने, CEC को हटाने और आयोग के भीतर हुई घटनाओं की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं आयोग सभी निर्णयों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कह रहा है। ऐसे में मतदाता सूची, आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।
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