Breaking

MNREGA name change: मनरेगा अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’, कैबिनेट की मुहर

MNREGA name change: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना, जिसे पहले महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MGNREGA) या संक्षेप में ‘मनरेगा’ के नाम से जाना जाता था, का नाम बदलकर अब ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार गारंटी’ करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। इस बैठक में जनगणना के लिए बजट आवंटन सहित कई अन्य अहम प्रस्तावों पर भी विचार किया गया, जिसमें मनरेगा का नाम बदलने का प्रस्ताव भी शामिल था। सरकार का मानना है कि इस नए नाम से योजना को एक नई पहचान और व्यापक स्वीकार्यता मिलेगी।

MNREGA name change: ग्रामीण रोज़गार को नया नाम: ‘पूज्य बापू’

मनरेगा, जिसे यूपीए सरकार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को रोज़गार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक अभियान के रूप में शुरू किया गया था, अब नए नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार गारंटी’ से संचालित होगी। यह नामकरण सरकार की हालिया नाम परिवर्तन की पहल का हिस्सा है। उदाहरण के लिए, सरकार ने हाल ही में देश के राज भवनों का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया है, और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए परिसर को भी ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है। ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार गारंटी बिल 2025’ को शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में प्रस्तुत किया गया, जिसे तत्काल प्रभाव से मंज़ूरी भी मिल गई है।

MNREGA name change: मनरेगा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मनरेगा योजना की शुरुआत 2 फरवरी, 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा देश के 200 ज़िलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 100 दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी प्रदान करना था। अपनी शुरुआती सफलता और व्यापक प्रभाव के कारण, साल 2008 के अंत तक इस योजना को चरणबद्ध तरीके से देश के सभी 593 ज़िलों में लागू कर दिया गया था।

मनरेगा का मूल नाम ‘महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट’ था। वर्तमान में, इस योजना से करीब 15 करोड़ 40 लाख लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के लिए इसका महत्व दर्शाता है।

रोज़गार गारंटी में बढ़ोतरी का प्रस्ताव

नाम बदलने के साथ-साथ, केंद्र सरकार ग्रामीण मज़दूरों के लिए एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार गारंटी’ योजना के तहत, ग्रामीण गरीबों को एक वर्ष में मिलने वाले रोज़गार गारंटी के दिनों की संख्या को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को और मज़बूत करेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ कृषि या अन्य मौसमी रोज़गार सीमित होते हैं। इस प्रस्ताव को भी जल्द ही कार्यान्वित किए जाने की संभावना है, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

शिक्षा सुधारों पर भी बड़ा फैसला

शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में केवल ग्रामीण रोज़गार ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्टान बिल 2025’ भी पेश किया गया है। हालाँकि, यह खबर लिखे जाने तक बिल को मंज़ूरी मिलने की संभावना जताई जा रही थी।

सरकार का दावा है कि इस विधेयक का उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था को विकसित और आधुनिक बनाना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि युवा पीढ़ी ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में सक्षम हो सके। यह शिक्षा सुधार विधेयक देश के शैक्षिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है।

Read More: Austria Hijab Ban: स्कूल में हिजाब पर बैन, ऑस्ट्रियाई संसद ने पारित किया सख्त कानून

Thetarget365

Recent Posts

Litchi Farming Tips: लीची की खेती पर मंडराया संकट, मौसम की मार से कम आए मंजर, किसान ऐसे बचाएं अपनी फसल

Litchi Farming Tips: इस वर्ष प्रकृति के बदलते मिजाज और तापमान में अनिश्चित उतार-चढ़ाव का…

5 hours ago

Chaitra Navratri 2026: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगी अपार शक्ति, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और पौराणिक कथा

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ रूपों की…

5 hours ago

Palam fire incident: पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे अरविंद केजरीवाल, मौके पर AAP और BJP कार्यकर्ताओं में भारी भिड़ंत

Palam fire incident: देश की राजधानी दिल्ली का पालम इलाका गुरुवार को उस समय अखाड़े…

5 hours ago

Kangana vs Rahul: “मीडिया भी उन्हें सीरियस नहीं लेता”, सपा सांसद ने कंगना को क्यों दिखाया आईना?

Kangana vs Rahul:  हिमाचल प्रदेश की मंडी संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की…

5 hours ago

This website uses cookies.