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Modi Government : मोदी सरकार के सुशासन में भारत से नागरिकों का पलायन, आंकड़े हैरान करने वाले

Modi Government : नरेंद्र मोदी सरकार के तहत भारत में नागरिकता नीति को लेकर विवादों के बीच एक और चिंता का विषय उभर कर सामने आया है – भारतीयों का बढ़ता पलायन। पिछले पांच वर्षों में लगभग 9 लाख भारतीय नागरिक देश छोड़ चुके हैं। 2024 में अकेले 2 लाख से अधिक भारतीयों ने देश छोड़ने का निर्णय लिया है, जबकि 2022 और 2023 में भी दो लाख से ज्यादा भारतीय नागरिकता त्याग चुके थे। यह प्रवृत्ति किसी भी देश के लिए चिंता का कारण बन सकती है, खासकर तब जब यह आंकड़े हर साल बढ़ते जा रहे हैं।

नागरिकता त्यागने के आंकड़े

सरकार ने हाल ही में राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि 2024 के पहले तीन महीनों में 2 लाख 6 हजार भारतीयों ने विदेश जाने का फैसला किया। यह संख्या 2023 में 2 लाख 16 हजार और 2022 में 2 लाख 25 हजार के आसपास रही। पिछले पांच वर्षों में यह संख्या बढ़ती जा रही है, और आंकड़े यह साफ़ दर्शाते हैं कि भारतीय नागरिकों का पलायन एक स्थिर और निरंतर प्रक्रिया बन चुकी है।

प्रतिभा पलायन: एक गंभीर चिंता

भारत से बाहर जाने वाले नागरिकों में अधिकांश युवा पेशेवर, उच्च शिक्षित और विशेषज्ञ होते हैं। इसे ‘प्रतिभा पलायन’ कहा जाता है, जो एक प्रकार की राष्ट्रीय चिंता बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छे रोजगार के अवसर, बेहतर जीवनशैली और अधिक स्थिरता की तलाश में ये लोग विदेशों का रुख कर रहे हैं। इससे भारत की सबसे कुशल और शिक्षित ताकत का नुकसान हो रहा है, जो देश के विकास में अहम भूमिका निभा सकती थी।

क्या वजह है भारत से पलायन करने की?

इस बढ़ते पलायन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जानकारों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत का कर ढांचा और सरकारी नीतियां अधिक जटिल हो गई हैं, जिससे देश में व्यापार और रोजगार के अवसर सीमित हो गए हैं। इसके अलावा, प्रदूषण, असहिष्णुता, हिंसा और आतंकवादी हमले जैसी घटनाएं भी शिक्षित और महत्वाकांक्षी भारतीयों के लिए एक डर का कारण बन गई हैं। कई लोग बेहतर जीवन और सुरक्षित माहौल की तलाश में विदेश जाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

क्या मोदी सरकार का ‘सुशासन’ इन समस्याओं का समाधान कर पा रहा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा अपने कार्यकाल में नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार का दावा करते रहे हैं, लेकिन इस बढ़ते पलायन को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या यह दावा सही है। यदि भारत में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं, और नागरिकों को बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाना पड़ रहा है, तो यह निश्चित रूप से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है।

आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं ने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। अगर प्रतिभा पलायन की यह प्रवृत्ति इसी तरह जारी रहती है, तो इसका प्रभाव देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर पड़ सकता है। भारत सरकार को इस दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि कुशल पेशेवरों और नागरिकों का पलायन रुक सके और देश में विकास और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकें।

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