Mohan Bhagwat on Population Policy
Mohan Bhagwat on Population Policy : उत्तर प्रदेश के पावन धाम वृंदावन में आयोजित एक आश्रम के लोकार्पण समारोह के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण, धर्मांतरण और घुसपैठ जैसे विषयों को उठाते हुए समाज को जागरूक होने का आह्वान किया। भागवत ने कहा कि वर्तमान समय में जनसंख्या नीति पर व्यापक पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में जनसंख्या को लेकर जो भी नियम या कानून बनाया जाए, वह भारत के सभी नागरिकों पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार, एक संतुलित जनसंख्या ही राष्ट्र की प्रगति का आधार बनती है।
जनसंख्या शास्त्र और मनोविज्ञान का हवाला देते हुए मोहन भागवत ने एक दिलचस्प सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों और डॉक्टरों के शोध के अनुसार, एक परिवार में तीन बच्चों का होना माता-पिता और बच्चों दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहता है। भागवत ने तर्क दिया कि ‘मानस शास्त्र’ (Psychology) भी यही बताता है कि जिस परिवार में तीन बच्चे होते हैं, वहां बच्चों का व्यक्तित्व अधिक संतुलित और सामाजिक बनता है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों में आपसी तालमेल बेहतर होता है और बच्चों के बीच झगड़े कम होते हैं, जिससे एक स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। यह बयान भविष्य की जनसंख्या नीति को लेकर एक नई बहस छेड़ सकता है।
धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए सरसंघचालक ने स्पष्ट किया कि संघ उन लोगों को वापस लाने के प्रयासों में जुटा है जो पहले हिंदू थे लेकिन किन्हीं कारणों से दूसरे संप्रदायों में चले गए। उन्होंने कहा कि भारत में सभी नागरिकों के साथ समानता का व्यवहार होना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। भागवत के अनुसार, हिंदू देशीय लोगों को समाज में विशेष अवसर और रोजगार के क्षेत्र में प्राथमिकता दी जा सकती है। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वे अपने सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करें और धर्मांतरण की कोशिशों के प्रति सतर्क रहें।
देश की सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता पर बात करते हुए मोहन भागवत ने घुसपैठ को एक बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि चोरी-छिपे सीमा पार से आए लोग अक्सर देश में बड़ी अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का कारण बनते हैं। भागवत ने समाज से अपील की कि यदि कहीं भी किसी संदिग्ध घुसपैठिए की जानकारी मिले, तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को दी जानी चाहिए। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे लोगों को किसी भी प्रकार का रोजगार नहीं दिया जाना चाहिए। समाज और प्रशासन को मिलकर अवैध घुसपैठ और धर्मांतरण रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि केवल सरकार के भरोसे बैठकर समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज को अपनी भूमिका समझनी होगी। उन्होंने कहा कि चाहे वह जनसंख्या नियंत्रण हो या घुसपैठ रोकना, जब तक समाज और प्रशासन एक साथ मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे। वृंदावन की इस सभा में उनके बयानों ने आगामी समय के लिए संघ की प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है, जिसमें सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है।
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