Iran-US War : अमेरिका के साथ अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) के बाद ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने दुनिया के सामने अपना पहला आधिकारिक और बेहद आक्रामक बयान जारी किया है। खामेनेई ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान युद्ध का पक्षधर नहीं है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि वह अपने अधिकारों और संप्रभुता के साथ कोई समझौता करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अब पहले जैसा देश नहीं रहा और जो कोई भी ईरान की धरती पर हमला करने की जुर्रत करेगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मोजतबा ने इस सीजफायर को ईरान की नैतिक और कूटनीतिक जीत बताते हुए कहा कि अमेरिका को ईरान की शर्तें मानने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

Iran-US War : शक्ति प्रदर्शन: दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने की ओर ईरान के कदम
पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को भविष्य के प्रति सचेत किया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब एक वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। सुप्रीम लीडर ने स्पष्ट किया कि ईरान अब अपनी रणनीतिक स्थिति का पूरा लाभ उठाएगा। विशेष रूप से ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) को लेकर उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अब इस जलमार्ग का इस्तेमाल ईरान के आर्थिक फायदों के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, “बहुत हुई भलाई, अब होर्मुज से कमाई होगी।” इसके साथ ही उन्होंने ईरान के नुकसान के मुआवजे और शहीदों के खून की कीमत वसूलने की भी बात कही।
Iran-US War : इजरायल को चेतावनी: लेबनान पर हमले रोकने की सख्त हिदायत
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी इस मौके पर इजरायल के प्रति सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि लेबनान पर इजरायल के निरंतर हमले सीजफायर की शर्तों का खुला उल्लंघन हैं। पेजेश्कियान ने चेतावनी दी कि यदि इजरायल तुरंत पीछे नहीं हटता, तो पाकिस्तान में होने वाली आगामी बातचीत का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने वैश्विक समुदाय को याद दिलाया कि भले ही युद्धविराम के कागजों पर हस्ताक्षर हुए हों, लेकिन ईरानी सेना पूरी तरह सतर्क है और उनकी “उंगलियां अब भी ट्रिगर पर हैं।” ईरान किसी भी तरह की धोखेबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
युद्ध की विभीषिका: लेबनान में बढ़ता मौतों का आंकड़ा और मानवीय संकट
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने लेबनान में इजरायली हमलों से हुई तबाही के आंकड़े साझा करते हुए दुनिया का ध्यान इस मानवीय संकट की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हालिया हमलों में 200 से अधिक निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है और 1000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। लाखों लोग बेघर होकर पलायन करने को मजबूर हैं। पेजेश्कियान ने अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ वाशिंगटन सीजफायर की वकालत कर रहा है, तो दूसरी तरफ उसका सहयोगी इजरायल हमले जारी रखे हुए है।
नेतन्याहू की हठधर्मिता: अमेरिका को पड़ सकती है भारी
ईरान ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों को अमेरिका के लिए आत्मघाती बताया है। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि नेतन्याहू अमेरिका के शांति प्रयासों से अलग दिशा में जा रहे हैं, जो अंततः अमेरिका के हितों को ही नुकसान पहुँचाएगा। उन्होंने साफ किया कि यदि इजरायल ने अपने हमले बंद नहीं किए, तो ईरान को मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी होगी। इस बयानबाजी ने पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता से पहले पूरे मध्य पूर्व में एक बार फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है, जहाँ कूटनीतिक सुलह की कोशिशों पर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं।
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