Iran Supreme Leader: क्या इस दिन सार्वजनिक होंगे मोजतबा खामनेई? 28 फरवरी के बाद नहीं आए सामने

Iran Supreme Leader:  ईरान में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ ने संकेत दिया है कि शनिवार को दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की स्मृति में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका नेतृत्व दिवंगत नेता के पुत्र और ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई करेंगे। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हवाई हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर की मृत्यु के बाद से ही मोजतबा को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। यह सभा उनकी पहली बड़ी सार्वजनिक उपस्थिति हो सकती है, जिसे लेकर ईरान के राजनीतिक गलियारों में भारी उत्सुकता है।

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हमले के बाद से रहस्यमयी बनी हुई है मोजतबा की स्थिति

गौरतलब है कि 28 फरवरी को हुए उस भीषण हमले में सुप्रीम लीडर के साथ उनके परिवार के कई सदस्य और वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए थे। हालांकि, मोजतबा इस हमले में जीवित बच गए थे, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों में उनकी स्थिति को लेकर विरोधाभासी दावे किए गए। कहीं उनके घायल होने की बात कही गई, तो कहीं यह दावा किया गया कि वे कोमा में हैं। हालांकि आईआरजीसी (IRGC) के माध्यम से उनके नाम पर बयान जारी होते रहे, लेकिन पिछले कई महीनों से मोजतबा का कोई भी वीडियो या प्रत्यक्ष दृश्य सामने नहीं आया है। इसी कारण उनकी सेहत और सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में कयास लगाए जा रहे थे।

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सुरक्षा और इजराइली खतरे के साये में उत्तराधिकार

मोजतबा खामनेई ने अपने पिता के निधन के एक सप्ताह बाद ही पदभार संभाला था, लेकिन वे पिता के छह दिनों तक चले अंतिम संस्कार में भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए थे। इसका प्रमुख कारण इजराइल द्वारा दी गई प्रत्यक्ष धमकियां बताई जा रही हैं। इजराइल ने खुले तौर पर घोषणा की थी कि वह ईरान के नए नेतृत्व को अपना निशाना बनाएगा। मोजतबा की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अत्यंत सतर्क है, क्योंकि इजराइल की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के बीच एक सुप्रीम लीडर की सार्वजनिक मौजूदगी किसी बड़ी सुरक्षा चुनौती से कम नहीं है।

अली खामनेई का 37 वर्षीय शासन और अंतिम संस्कार

दिवंगत अयातुल्ला अली खामनेई, जिन्होंने करीब 37 वर्षों तक ईरान पर एकछत्र शासन किया, को शुक्रवार तड़के उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। 1747 में नादिर शाह के बाद, खामनेई दूसरे ऐसे शासक हैं जिन्हें मशहद में दफनाया गया है। उनके निधन के बाद ईरान ने शोक की लंबी अवधि देखी और तेहरान सहित कई बड़े शहरों में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान हवाई क्षेत्र और सड़कों को बंद कर दिया गया था, ताकि लाखों की संख्या में उमड़े लोग अपने पूर्व नेता को अंतिम विदाई दे सकें।

भविष्य की राह और ईरान का बदलता परिदृश्य

खामनेई की मृत्यु और 28 फरवरी के हमलों ने ईरान में एक नए युग की शुरुआत की है, जो संघर्ष और अनिश्चितता से भरा है। मोजतबा खामनेई के सामने अपने पिता की विरासत को बचाने और देश को युद्ध की स्थिति से बाहर निकालने की बड़ी चुनौती है। शनिवार की श्रद्धांजलि सभा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि मोजतबा की सत्ता पर पकड़ और उनके नेतृत्व की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक पल होगा। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मोजतबा वाकई इस सभा में नजर आएंगे और आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति किस करवट बैठेगी।

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