अपराध

Mother Sold Children: ममता हुई शर्मसार! नासिक में 12 बच्चों की माँ पर तीन बच्चों को बेचने का गंभीर आरोप

Mother Sold Children: कहा जाता है कि एक माँ और बच्चे का रिश्ता दुनिया में सबसे पवित्र होता है, लेकिन जब कोई माँ पैसों के लिए अपने ही बच्चों को एक-एक करके बेच दे, तो क्या उसे कुमाता कहना गलत होगा? महाराष्ट्र के नासिक जिले से एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला और मानवता को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। नासिक के टाके देवगांव स्थित आदिवासी बस्ती में रहने वाली 45 वर्षीय बच्चुबाई विष्णु हंडोगे पर यह गंभीर आरोप लगा है कि उन्होंने पैसे के लालच में अपनी ममता को ताक पर रखते हुए अपने तीन बच्चों को कथित तौर पर बेच दिया।

Mother Sold Children: स्वास्थ्य विभाग की जाँच में सामने आया मामला

यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब स्वास्थ्य विभाग ने एक नियमित जांच के दौरान गड़बड़ी पाई। दरअसल, 10 अक्टूबर 2025 को विष्णु हंडोगे ने एक बच्चे को जन्म दिया था, जिसका वजन काफी कम था। बच्चे के कम वजन को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने फॉलो-अप के लिए आशा वर्कर्स को महिला के घर भेजा। आशा कार्यकर्ताओं को घर में बच्चों की संख्या को लेकर कुछ गड़बड़ी महसूस हुई और उन्हें शक हुआ। उन्होंने तत्काल पूरे मामले की गहनता से जाँच करने की मांग की, जिसके बाद पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आ गई। पुलिस और सरकारी अधिकारियों की एक टीम ने विष्णु हंडोगे के घर पहुंचकर जाँच शुरू की।

Mother Sold Children: पुलिस हिरासत में माँ-बाप और बच्चे लेने वाले परिवार

मामले की गंभीरता को समझते हुए, पुलिस ने तत्काल विष्णु हंडोगे और उनके पति को हिरासत में ले लिया और उनसे पूछताछ शुरू कर दी। हालाँकि, महिला ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि उसने अपने तीन बच्चों को बेचा नहीं है, बल्कि अपने रिश्तेदारों को गोद दिया है। पुलिस ने उन तीन परिवारों के सदस्यों को भी हिरासत में लिया है, जिन्हें कथित तौर पर ये बच्चे सौंपे गए थे, ताकि मामले की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, प्रशासन ने पाँच सदस्यों की एक उच्च-स्तरीय जाँच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी विस्तृत जाँच करेगी कि क्या यह गोद लेने का कानूनी मामला है या बच्चों की खरीद-फरोख्त (Child Trafficking) का गंभीर अपराध।

पाँच सदस्यीय जाँच कमेटी का गठन, कानूनी कार्रवाई बाकी

जांच के दौरान बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए, पुलिस ने फिलहाल परिवार और सभी बच्चों को नासिक जिला महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के पास भेज दिया है। अधिकारी अब सभी संबंधित रिकॉर्ड और बयान इकट्ठा करेंगे। मामले की पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही, इस दावे की पुष्टि हो पाएगी कि यह ‘गोद’ लेने का मामला है या ‘बेचने’ का। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

यह घटना उन सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है, जिनके कारण ऐसे आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा और कल्याण खतरे में पड़ जाता है। इस पूरे मामले ने नासिक में लोगों को स्तब्ध कर दिया है और यह दिखाता है कि गरीबी और लालच कैसे मानवता और माँ की ममता के रिश्ते को भी प्रभावित कर सकता है।

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