MP Tiger State Status
MP Tiger State Status: ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव प्राप्त मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई है। हाल ही में मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रदेश में हो रही बाघों की मौतों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाघों की संख्या और उनकी मृत्यु से जुड़े चौंकाने वाले आँकड़े पेश किए। रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ एक ओर प्रदेश में बाघों की आबादी में 49 प्रतिशत की शानदार वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर पिछले पाँच वर्षों में 147 बाघों, बाघिनों और शावकों ने अपनी जान गँवाई है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाघों के बढ़ते कुनबे के साथ उनके प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं।
बाघों की मौत के कारणों का विश्लेषण करने पर एक चिंताजनक तथ्य सामने आया है। कुल 147 मौतों में से सर्वाधिक 82 बाघों की मौत आपसी संघर्ष (Infighting) के कारण हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बाघों की संख्या बढ़ रही है, उनके लिए जंगलों का क्षेत्रफल छोटा पड़ता जा रहा है। एक बाघ को अपना क्षेत्र (Territory) बनाने के लिए पर्याप्त जगह चाहिए होती है, और जगह की कमी के कारण वे एक-दूसरे पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, 44 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि 16 बाघों की जान शिकारियों के फंदों में फंसने से गई। शेष 5 मौतें अन्य संदिग्ध कारणों से दर्ज की गई हैं।
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि प्रदेश में बाघों के विशेष इलाज, देखभाल और सुरक्षा के लिए अब तक किसी स्पेशल फोर्स का गठन नहीं किया गया है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों और कर्मचारियों के बल पर ही इस विशाल वन्यजीव संपदा की निगरानी की जा रही है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि बाघों की बढ़ती आबादी को देखते हुए भविष्य में उनके लिए सुरक्षित गलियारे (Corridors) विकसित किए जाएंगे, जिससे उनके बीच होने वाले संघर्ष को कम किया जा सके।
बाघों को एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही प्रदान करने के लिए ‘वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर’ की योजना पर जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने मध्यप्रदेश में 7 कॉरिडोर चिन्हांकित किए हैं। वहीं, मध्यप्रदेश सरकार के 20 वर्षीय वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान में कुल 21 कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ये कॉरिडोर न केवल बाघों को सुरक्षित रास्ता देंगे, बल्कि आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) बनाए रखने में भी मदद करेंगे। वर्तमान में प्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे 9 प्रमुख टाइगर रिजर्व हैं, जहाँ बांधवगढ़ में बाघों का घनत्व सबसे अधिक है।
बाघों की मौत की चिंताजनक खबरों के बीच वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र से सुखद परिणाम भी मिले हैं। पिछले पाँच वर्षों में मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व देशी और विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। इस अवधि में 7.38 लाख से अधिक भारतीय और 85,700 से ज्यादा विदेशी पर्यटकों ने प्रदेश के जंगलों की सैर की। पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या से राज्य को पिछले पाँच वर्षों में लगभग 61.22 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। यह राजस्व वन्यजीवों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के विकास में खर्च किया जा रहा है।
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