Mullanpur Test : मुल्लांपुर में भारत के खिलाफ खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में अफगानिस्तान क्रिकेट टीम को एक बेहद शर्मनाक और एकतरफा हार का सामना करना पड़ा है। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ‘टेस्ट स्टेटस पॉलिसी’ (टेस्ट दर्जा देने की नीति) एक बार फिर दुनिया भर के खेल विशेषज्ञों के निशाने पर आ गई है। भारतीय क्रिकेट टीम ने इस मुकाबले में अपनी बादशाहत कायम रखते हुए अफगानिस्तान को एक पारी और 300 रनों के विशाल अंतर से शिकस्त दी।

भारतीय गेंदबाजों और बल्लेबाजों के दबदबे के कारण यह मैच महज तीन दिनों के भीतर ही खत्म हो गया। इस करारी हार के बाद भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर मनिंदर सिंह और पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल ने अफगानिस्तान को टेस्ट दर्जा दिए जाने के फैसले की कड़े शब्दों में आलोचना की है। दोनों पूर्व क्रिकेटरों का मानना है कि बिना मजबूत तैयारी के ऐसी टीमों को प्रमोट करने से टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक स्तर और उसकी क्वालिटी में लगातार गिरावट आ रही है।

मनिंदर सिंह का आईसीसी पर बड़ा हमला और बेंगलुरु टेस्ट का ऐतिहासिक हवाला
पूर्व भारतीय स्पिनर मनिंदर सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से विशेष बातचीत के दौरान आईसीसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खेल के सबसे प्रतिष्ठित प्रारूप में इस तरह के एकतरफा मुकाबले टेस्ट क्रिकेट की साख और उसकी क्वालिटी को गंभीर रूप से कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई टीम बल्लेबाजी के अनुकूल और अच्छी पिचों पर भी महज 100 रनों के आस-पास सिमट जाती है, तो यह साफ दर्शाता है कि वे तकनीकी और मानसिक रूप से अभी पांच दिवसीय क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
मनिंदर सिंह ने साल 2018 में बेंगलुरु में दोनों टीमों के बीच खेले गए ऐतिहासिक पहले टेस्ट मैच का हवाला भी दिया, जहां भारत ने अफगानिस्तान को एक पारी और 264 रनों से रौंदा था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बांग्लादेश के लंबे टेस्ट इतिहास और उसके संघर्षों से अब तक कोई सबक नहीं सीखा है।
टी20 के प्रदर्शन को टेस्ट दर्जे का आधार मानना पूरी तरह गलत
आंकड़ों पर नजर डालें तो अफगानिस्तान ने अपने क्रिकेट इतिहास में अब तक कुल 13 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें से उसे मात्र 3 मैचों में ही जीत नसीब हुई है। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश जैसी पुरानी टीम ने 158 टेस्ट मैचों में शिरकत की है और उसे केवल 27 मैचों में जीत मिली है; मजे की बात यह है कि बांग्लादेश आज तक भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक भी टेस्ट मैच जीतने में नाकाम रहा है।
मनिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि खेल की गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की टीम सीमित ओवरों के खेल (ODI) में भी खुद को पूरी तरह स्थापित नहीं कर पाई है। बेशक वे टी20 प्रारूप में एक बेहद खतरनाक और किसी भी बड़ी टीम को हराने का माद्दा रखने वाली टीम हैं, लेकिन सिर्फ फटाफट क्रिकेट के प्रदर्शन को आधार बनाकर किसी देश को टेस्ट टीम का तमगा दे देना पूरी तरह गलत है।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट का अभाव और जिम्बाब्वे की तरह दर्जा छीनने का सुझाव
मनिंदर सिंह के अनुसार, किसी भी देश को टेस्ट खेलने की अनुमति तब तक नहीं मिलनी चाहिए जब तक कि उसके पास एक बेहद मजबूत घरेलू फर्स्ट क्लास (चार दिवसीय) क्रिकेट का ढांचा न हो, जो वर्तमान में अफगानिस्तान के पास बिल्कुल नहीं है। पूर्व स्पिनर ने आईसीसी को एक व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे उतारने के बजाय पहले भारत ‘ए’, ऑस्ट्रेलिया ‘ए’, इंग्लैंड ‘ए’ और दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ चार दिवसीय अनौपचारिक मैच खेलने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
उन्होंने आईसीसी को बेहद सख्त सलाह देते हुए कहा कि अतीत में खराब प्रदर्शन और प्रशासनिक कारणों से जिम्बाब्वे जैसी टीम से भी टेस्ट स्टेटस वापस लिया जा चुका है। यदि अफगानिस्तान का प्रदर्शन अच्छी पिचों पर इसी तरह निराशाजनक बना रहता है, तो आईसीसी को उनका टेस्ट दर्जा वापस लेने के विकल्प पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल की आपत्ति और एसोसिएट देशों की नीति पर सवाल
विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल ने भी मनिंदर सिंह के सुर में सुर मिलाते हुए आईसीसी की नीतियों की कड़ी निंदा की। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में सवाल उठाया कि आखिर किस तार्किक आधार पर अफगानिस्तान को टेस्ट क्रिकेट खेलने की अनुमति दी गई थी? मदन लाल ने कहा कि उन्हें आज तक आईसीसी का यह गणित समझ नहीं आया कि आखिर क्यों एसोसिएट देशों को उनके वनडे (ODI) और टी20 (T20I) के रिकॉर्ड और प्रदर्शन को देखकर टेस्ट टीम की मान्यता सौंप दी जाती है।
उन्होंने साफ किया कि टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए खिलाड़ियों में जिस धैर्य, तकनीक और अनुशासन की आवश्यकता होती है, वह टी20 क्रिकेट की आक्रामकता से बिल्कुल अलग है। आईसीसी को अपनी इस नीति की समीक्षा तुरंत करनी चाहिए ताकि टेस्ट मैच अपनी प्रासंगिकता न खोएं।











