Mumbai Indians
Mumbai Indians : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन के आगाज के समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पांच बार की चैंपियन टीम, मुंबई इंडियंस, सबसे पहले टूर्नामेंट से बाहर होने के करीब खड़ी होगी। 2 मई को चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ मिली करारी हार ने मुंबई के जख्मों पर नमक छिड़क दिया है। मैच के बाद कप्तान हार्दिक पांड्या के बयान ने साफ कर दिया कि टीम के अंदर आत्मविश्वास की भारी कमी है। हार्दिक ने निराशा भरे लहजे में स्वीकार किया कि यह पूरा सीजन ही उनकी टीम के हक में नहीं रहा। 9 मैचों में लगातार खराब प्रदर्शन के बाद अब टीम के वजूद पर सवाल उठ रहे हैं।
मुंबई इंडियंस की सबसे बड़ी ताकत उसकी बल्लेबाजी मानी जाती थी, लेकिन 2026 में यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई। टी20 के नंबर एक बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव इस सीजन में पूरी तरह लय से बाहर नजर आए। सूर्या केवल 20 के औसत से 183 रन ही बना सके, जो उनकी साख के विपरीत है। वहीं, युवा सनसनी तिलक वर्मा ने एक शतक तो जड़ा, लेकिन उसके बाद वे लगातार फ्लॉप रहे। टीम मैनेजमेंट ने इन खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा दिखाया और बेंच पर बैठे प्रतिभावान विकल्पों को आजमाने में देरी कर दी, जो अंततः टीम के लिए घातक साबित हुआ।
टीम के पूर्व कप्तान ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा का सीजन के बीच में चोटिल होना मुंबई के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। शुरुआती चार मैचों में रोहित ने 45 के औसत से शानदार बल्लेबाजी की थी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति ने न केवल बल्लेबाजी क्रम को कमजोर किया, बल्कि मैदान पर उस रणनीतिक अनुभव को भी खत्म कर दिया जो कठिन परिस्थितियों में टीम के काम आता था। हार्दिक पांड्या की कप्तानी में वह ‘रोहित वाली छाप’ गायब दिखी, जिसके लिए मुंबई इंडियंस जानी जाती थी।
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के लिए भी यह सीजन किसी बुरे सपने जैसा रहा। टी20 वर्ल्ड कप में आग उगलने वाले बुमराह आईपीएल में केवल 3 विकेट ही ले सके। इसके पीछे विरोधी टीमों की बेहतर तैयारी और मुंबई की कमजोर गेंदबाजी रणनीति जिम्मेदार रही। बुमराह को कभी पावरप्ले के बाद लाया गया तो कभी बहुत पहले, जिससे वे अपनी लय नहीं पकड़ पाए। बल्लेबाजों ने अब बुमराह के खिलाफ रक्षात्मक खेलने के बजाय रन बनाने के नए तरीके ढूंढ लिए हैं, जिससे उनका खौफ कम होता दिखा।
मुंबई इंडियंस की इस दुर्गति का सबसे बड़ा ठीकरा कप्तान हार्दिक पांड्या पर फोड़ा जा रहा है। हार्दिक न तो बल्ले से योगदान दे पाए और न ही गेंद से। 9 मैचों में उनके नाम सिर्फ 146 रन और 4 विकेट रहे। एक कप्तान के तौर पर हार्दिक दबाव वाले क्षणों में गलत फैसले लेते दिखे। गेंदबाजों के रोटेशन और आक्रामक फील्डिंग सेट करने में वे पूरी तरह विफल रहे। इससे पहले मुंबई इंडियंस खराब शुरुआत के बाद वापसी के लिए जानी जाती थी, लेकिन हार्दिक के नेतृत्व में टीम में वह जुझारूपन कहीं नजर नहीं आया।
आधुनिक टी20 क्रिकेट में पहले 6 ओवर्स का खेल मैच की दिशा तय करता है। जहां अन्य टीमें पावरप्ले में 70-80 रन बना रही थीं, वहीं मुंबई इंडियंस विकेट बचाने के चक्कर में बेहद धीमी रही। पूरे सीजन में टीम सिर्फ एक बार पावरप्ले में 70 का आंकड़ा पार कर सकी। अब मुंबई के पास केवल 5 मैच बचे हैं। अगर वे सभी मैच जीत भी जाते हैं, तो भी उन्हें प्लेऑफ के लिए दूसरी टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना होगा। एक और हार का मतलब होगा मुंबई इंडियंस का आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से बाहर होना।
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