Groundnut Farming
Groundnut Farming : खेती-किसानी में मुनाफे का सीधा संबंध सही समय पर सही फसल के चयन से होता है। वर्तमान में मई और जून का महीना चल रहा है, जो भारतीय किसानों के लिए खरीफ सीजन की तैयारियों का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। आमतौर पर इस दौरान किसान परंपरागत रूप से धान और मक्का जैसी फसलों की योजना बनाते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मूंगफली की खेती एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। कम लागत, न्यूनतम सिंचाई की आवश्यकता और बाजार में साल भर रहने वाली भारी मांग के कारण मूंगफली अब किसानों की पसंदीदा नकदी फसल बनती जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मूंगफली मूल रूप से गर्म जलवायु की फसल है। मई और जून के दौरान बढ़ता तापमान इसके बीजों के अंकुरण (Germination) के लिए बेहद अनुकूल होता है। कई प्रगतिशील किसान मानसून के सक्रिय होने से ठीक पहले इसकी बुवाई पूरी कर लेते हैं, ताकि शुरुआती विकास के बाद फसल को प्राकृतिक वर्षा का लाभ मिल सके। मूंगफली न केवल सीधे उपभोग के लिए बेची जाती है, बल्कि खाद्य तेल उद्योग में भी इसकी निरंतर मांग रहती है। यही कारण है कि इसे एक सुरक्षित निवेश वाली फसल के रूप में देखा जाता है जो कम समय में किसानों की झोली भर सकती है।
अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की गुणवत्ता और उसकी संरचना पर ध्यान देना अनिवार्य है। मूंगफली की खेती के लिए हल्की दोमट या रेतीली और भुरभुरी मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है। ऐसी मिट्टी में मूंगफली की कलियां (Pods) आसानी से विकसित होती हैं। बुवाई से पहले खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी नरम हो जाए। एक खास बात जिसका ध्यान रखना चाहिए वह है जल निकासी; खेत में पानी का जमाव मूंगफली के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। भुरभुरी मिट्टी जड़ों के बेहतर विकास और हवा के संचार में भी मदद करती है।
फसल की सफलता का 50 प्रतिशत दारोमदार बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। किसानों को हमेशा सरकारी केंद्रों से प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीजों का ही चुनाव करना चाहिए। बुवाई से पहले बीजों को उपचारित करना चाहिए ताकि मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो सके। बुवाई करते समय ‘लाइन से लाइन’ और ‘पौधे से पौधे’ की एक निश्चित दूरी बनाए रखना जरूरी है। इससे प्रत्येक पौधे को सूर्य का प्रकाश, हवा और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं, जिससे उत्पादन में कई गुना वृद्धि संभव है।
यद्यपि मूंगफली को धान की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके जीवन चक्र के कुछ चरणों में हल्की सिंचाई बहुत महत्वपूर्ण होती है। विशेषकर जब फूल आने लगें और जमीन के अंदर फलियां बनने का समय हो, तब मिट्टी में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। इसके अलावा, खेत की नियमित निगरानी आवश्यक है। खरपतवार न केवल पोषक तत्व चुराते हैं बल्कि कीटों को भी आमंत्रण देते हैं। समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से मिट्टी में ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है और फलियां स्वस्थ बनती हैं।
मूंगफली की फसल में अक्सर फफूंद (Fungus) और कुछ विशेष कीटों का हमला होता है। यदि पत्तियों पर धब्बे दिखाई दें या पौधों का विकास अचानक रुक जाए, तो किसानों को बिना देरी किए कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए। जैविक कीटनाशकों का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान वैज्ञानिक पद्धति और धैर्य के साथ मूंगफली की खेती करें, तो वे इस सीजन में अपनी आय को दोगुना करने का लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
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