अंबिकापुर @thetarget365 छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण शहर, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है। लेकिन आजकल यह शहर एक अन्य कारण से चर्चा में है—नगर निगम की वित्तीय स्थिति और जर्जर सड़कों की दुर्दशा। नगर निगम ने हाल ही में दीवारों की पेंटिंग पर खर्च करने की योजना बनाई है, जिसकी बकायदा निविदा निकाली गई है। जबकि शहर की सड़कों की स्थिति अत्यंत खस्ताहाल है। यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
नगर निगम का वित्तीय संकट
नगर निगम अंबिकापुर हमेशा पैसों की कमी का रोना रोता है। यहां उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो रहा है। जब नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं की बात आती है, तो निगम की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से उल्टी हैं। सड़कें गड्ढों में तब्दील, अनियमित जल प्रदाय व्यवस्था और यातायात जाम एक आम समस्या बन गई है। ऐसे में दीवारों की पेंटिंग के लिए फंड आवंटित करना समझ से परे है।
सड़कों की जर्जर स्थिति
सड़कें किसी भी शहर की धड़कन होती हैं। वे न केवल परिवहन का माध्यम हैं, बल्कि नागरिकों की दैनिक जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा हैं। अंबिकापुर की सड़कों की स्थिति इतनी खराब है कि कई स्थानों पर चलना तक मुश्किल हो गया है। गड्ढे, कीचड़ और जलभराव के कारण लोग रोजाना परेशान होते हैं। यह सिर्फ एक अव्यवस्था नहीं है; यह स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
वर्तमान में दीवारों की पेंटिंग: एक फिजूल खर्ची
नगर निगम के लोक निर्माण विभाग ने 18 अक्टूबर को शहर के 06 जोनों के लिए एक निविदा जारी की है। जिसमे डिजाइनिंग सहित फाइन आर्ट एवं वॉल पेंटिंग का कार्य करने का अलग-अलग राशि का उल्लेख किया गया है। जब नगर निगम ने दीवारों की पेंटिंग पर खर्च करने का निर्णय लिया, तो यह सवाल उठता है कि क्या यह सही दिशा है? दीवारों की पेंटिंग एक सौंदर्यीकरण का कार्य है, लेकिन क्या यह प्राथमिकता होनी चाहिए? क्या इस तरह के खर्च को जर्जर सड़कों के सुधार के बजाय प्राथमिकता दी जानी चाहिए? यह स्पष्ट है कि यह कदम केवल एक दिखावा है, जो वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का प्रयास है।
दीवारों की पेंटिंग: स्थायी समाधान नहीं
दीवारों की पेंटिंग एक अस्थायी समाधान है। यह शहरी सौंदर्य में इजाफा कर सकती है, लेकिन जब तक जर्जर सड़कों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक यह एक तात्कालिक सुधार ही रहेगा। निगम को समझना चाहिए कि स्थायी विकास के लिए दीर्घकालिक योजनाओं की आवश्यकता है।