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Nag Panchami 2025 : नाग पंचमी 2025: कैसे हुई शुरुआत और क्यों प्रिय है पंचमी तिथि नागों को?

Nag Panchami 2025 : इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व 27 जुलाई 2025 को पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन नागों की पूजा के लिए समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु विधिपूर्वक नाग देवता की आराधना करते हैं और उन्हें दूध, फूल, धूप आदि अर्पित करते हैं।

नागों का उद्गम: कश्यप ऋषि और कद्रू से हुआ नाग वंश का प्रारंभ

पुराणों के अनुसार, नागों की उत्पत्ति महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से मानी जाती है। भविष्य पुराण में वर्णन है कि कद्रू और कश्यप ऋषि के संयोग से नाग जाति की उत्पत्ति हुई। इस कारण नागों को कद्रू का संतान और प्राकृतिक शक्तियों से युक्त देवता माना जाता है। नाग पंचमी का उत्सव इसी वंश की पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है।

पौराणिक कथा: कद्रू के श्राप से नागों का हुआ विनाश का योग

नाग पंचमी की मान्यता एक प्राचीन कथा पर आधारित है। कथा के अनुसार, एक दिन कद्रू और विनीता नामक दो बहनें विहार करते समय एक सफेद घोड़े को देखती हैं। कद्रू कहती हैं कि घोड़े की पूंछ काली थी, लेकिन विनीता कहती हैं कि वह पूरी तरह सफेद था। जीतने की जिद में कद्रू अपने नाग पुत्रों से कहती हैं कि वे पूंछ से लिपट जाएं ताकि वह काली दिखाई दे। लेकिन नाग पुत्रों ने इस धोखे में साथ देने से इंकार कर दिया। इससे नाराज होकर कद्रू ने अपने ही बच्चों को श्राप दे दिया कि वे एक दिन राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ में जलकर भस्म हो जाएंगे।

राजा जनमेजय का सर्प यज्ञ: नागों के विनाश का भयानक दृश्य

कालांतर में वही हुआ। राजा परीक्षित, जो कि पांडव वंश के थे, उन्हें एक नाग ने डस लिया जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना से उनके पुत्र जनमेजय अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने सर्प मेध यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में असंख्य नाग अग्नि में गिरकर भस्म होने लगे। पूरा नाग वंश समाप्ति की ओर बढ़ चला।

आस्तिक मुनि ने बचाई नागों की प्रजाति

जब यह विनाश चरम पर था, तभी आस्तिक मुनि वहां पहुंचे। वे मुनि जरत्कारु और नाग कन्या ममता के पुत्र थे। उन्होंने राजा जनमेजय को इस यज्ञ को विराम देने के लिए मनाया। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर राजा ने यज्ञ रोक दिया और बचा हुआ नाग वंश जीवित रह गया। यह घटना पंचमी तिथि को हुई थी, इसलिए नागों के लिए यह दिन विशेष बन गया। कहते हैं कि इस दिन आस्तिक मुनि ने नागों को ठंडा दूध पिलाया था जिससे वे शांति और राहत पा सके।

ब्रह्मा जी ने दिया वरदान

पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि यज्ञ रुकने के बाद ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उन्होंने नागों को आशीर्वाद दिया कि पंचमी तिथि को जो व्यक्ति श्रद्धा से तुम्हारी पूजा करेगा, तुम उसकी रक्षा करोगे। इस कारण हर वर्ष श्रावण मास की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन लोग नागों की पूजा कर दूध चढ़ाते हैं और उनसे सुरक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

आज भी नाग पंचमी पर जीवित सांपों या प्रतीकों की होती है पूजा

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नाग पंचमी विभिन्न रूपों में मनाई जाती है। कहीं जीवित नागों की पूजा होती है, तो कहीं मिट्टी या चित्र के रूप में नाग देवता की आराधना की जाती है। कई स्थानों पर कहानी सुनने और दान देने की परंपरा भी है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, पूजा करती हैं और सर्प देवता से अपने परिवार की रक्षा की कामना करती हैं।

नाग पंचमी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह प्राकृतिक और पौराणिक संतुलन का प्रतीक भी है। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि प्रकृति की हर रचना — चाहे वह भयावह प्रतीत हो — पूज्यनीय हो सकती है यदि उसके साथ संतुलन और सम्मान का संबंध रखा जाए। 27 जुलाई 2025 को मनाई जा रही नाग पंचमी, न केवल नागों के सम्मान का दिन है, बल्कि मानव और प्रकृति के संबंधों की गहराई को समझने का भी अवसर है।

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